Passage 103.5
अन्नमयँ हि सोम्य मन आपोमयः प्राणस्तेजोमयी वागिति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच ॥ ५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[पिता], सोम्य, मनः हि अन्नमयम् [अस्ति]; प्राणः आपोमयः [अस्ति]; वाक् तेजोमयी [अस्ति] इति [उवाच] । [सः], भगवान् मा भूयः एव विज्ञापयतु इति [उवाच] । [पिता], तथा, सोम्य इति ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
“क्योंकि, प्रिय, मन अन्नमय है, प्राण जलमय है और वाणी तेजोमयी है।” श्वेतकेतु ने कहा, “भगवन्, मुझे और समझाइए।” उन्होंने कहा, “ऐसा ही होगा, प्रिय।”
English meaning
“For, my dear, mind is made of food, vital breath of water, and speech of heat.” Śvetaketu said, “Please, sir, make me understand further.” He replied, “So I shall, my dear.”
व्याख्या
दोहराव जानबूझकर रखा गया है: दही का उदाहरण सुनने के बाद भी अधिक समझ की माँग होती है। अगला खण्ड मन और अन्न के सम्बन्ध को श्वेतकेतु के अनुभव से दिखाएगा।
Explanation
The repetition is deliberate: even after the curd example, further understanding is requested. The next section explores food and mind through Śvetaketu’s experience.
संदर्भ
सार फिर दोहराया जाता है, पर पुत्र का प्रश्न अभी समाप्त नहीं हुआ है।
Context
The summary is repeated, but the pupil’s questioning is not yet finished.