Passage 99.4
ता आप ऐक्षन्त बह्व्यः स्याम प्रजायेमहीति ता अन्नमसृजन्त । तस्माद्यत्र क्व च वर्षति तदेव भूयिष्ठमन्नं भवत्यद्भ्य एव तदध्यन्नाद्यं जायते ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
ताः आपः, बह्व्यः स्याम, प्रजायेमहि इति ऐक्षन्त; ताः अन्नम् असृजन्त । तस्मात् यत्र क्व च वर्षति, तत् [तत्र] एव भूयिष्ठम् अन्नम् भवति; तत् अद्भ्यः एव अधि अन्नाद्यम् जायते ।
हिन्दी अर्थ
“उन जलों ने विचार किया, ‘हम अनेक हो जाएँ, सन्तति उत्पन्न करें।’ उन्होंने अन्न उत्पन्न किया। इसीलिए जहाँ कहीं वर्षा होती है, वहीं अन्न अधिक होता है; जल से ही खाने योग्य अन्न उत्पन्न होता है।”
English meaning
“Those waters considered, ‘May we become many; may we bring forth offspring.’ They produced food. Therefore, wherever rain falls, food is most plentiful; from water indeed arises food to be eaten.”
व्याख्या
अन्न भोजन है; आगे की तत्त्व-व्यवस्था में वह स्थूल, पृथ्वीगत पदार्थ का प्रतिनिधि भी है। वर्षा और अन्न की प्रचुरता का उदाहरण उस प्राचीन सम्बन्ध को स्पष्ट करता है। जलों का बहुवचन और उनका सामूहिक संकल्प सुरक्षित है।
Explanation
Anna means food and also represents the solid, earth-related member of the ensuing elemental scheme. Rainfall and plentiful food illustrate that relation. The waters’ plural voice is preserved.
संदर्भ
जल से अन्न की उत्पत्ति तीसरे तत्त्व तक पहुँचाती है।
Context
The production of food from water completes the threefold sequence.