Passage 99.3
तदैक्षत बहु स्यां प्रजायेयेति तत्तेजोऽसृजत । तत्तेज ऐक्षत बहु स्यां प्रजायेयेति तदपोऽसृजत । तस्माद्यत्र क्वच शोचति स्वेदते वा पुरुषस्तेजस एव तदध्यापो जायन्ते ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत्, बहु स्याम्, प्रजायेय इति ऐक्षत; तत् तेजः असृजत । तत् तेजः, बहु स्याम्, प्रजायेय इति ऐक्षत; तत् अपः असृजत । तस्मात् यत्र क्वच पुरुषः शोचति स्वेदते वा, तत् [तदा] तेजसः एव अधि आपः जायन्ते ।
हिन्दी अर्थ
“उसने विचार किया, ‘मैं अनेक हो जाऊँ, सन्तति के रूप में प्रकट होऊँ।’ उसने तेज उत्पन्न किया। उस तेज ने विचार किया, ‘मैं अनेक हो जाऊँ, सन्तति के रूप में प्रकट होऊँ।’ उसने जल उत्पन्न किया। इसीलिए जहाँ कहीं मनुष्य शोक से तपता है या पसीना बहाता है, वहाँ तेज से ही जल उत्पन्न होता है।”
English meaning
“It considered, ‘May I become many; may I bring forth offspring.’ It produced heat and radiance. That heat considered, ‘May I become many; may I bring forth offspring.’ It produced water. Therefore, whenever a person burns with grief or sweats, water arises from heat.”
व्याख्या
तेज में अग्नि, ऊष्मा और प्रकाश के अर्थ जुड़े हैं। ऐक्षत सृष्टि को संकल्प या दृष्टि की भाषा में प्रस्तुत करता है। शोक और पसीने का उदाहरण इसी प्राचीन उत्पत्ति-विचार का अंश है, आधुनिक शरीरक्रिया-विज्ञान का विवरण नहीं।
Explanation
Tejas carries associations of fire, heat, and radiance. Aikṣata describes origination through consideration or intention. The grief-and-sweat example belongs to this ancient account, not to a modern physiological explanation.
संदर्भ
सत् से तेज और तेज से जल की उत्पत्ति का क्रम बताया जाता है।
Context
The sequence moves from Being to heat and from heat to water.