Passage 63.3
ब्रह्मणः सोम्य ते पादं ब्रवाणीति ब्रवीतु मे भगवानिति तस्मै होवाचाग्निः कला सूर्यः कला चन्द्रः कला विद्युत्कलैष वै सोम्य चतुष्कलः पादो ब्रह्मणो ज्योतिष्मान्नाम ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[हंसः आह—] सोम्य, ब्रह्मणः ते पादम् ब्रवाणि इति । [सत्यकामः आह—] भगवान् मे ब्रवीतु इति । [हंसः] तस्मै ह उवाच—अग्निः कला [अस्ति]; सूर्यः कला [अस्ति]; चन्द्रः कला [अस्ति]; विद्युत् कला [अस्ति] । सोम्य, वै एषः ब्रह्मणः चतुष्कलः पादः ज्योतिष्मान् नाम [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
हंस ने कहा: “प्रिय, मैं तुम्हें ब्रह्म का एक पाद बताऊँ।” उसने कहा: “भगवन्, मुझे बताइए।” हंस ने कहा: “अग्नि एक कला है, सूर्य एक कला है, चन्द्रमा एक कला है और बिजली एक कला है। प्रिय, ब्रह्म का यह चार कलाओं वाला पाद ज्योतिष्मान् कहलाता है।”
English meaning
The swan said, “Dear one, let me tell you a quarter of Brahman.” He replied, “Please tell me, sir.” The swan said, “Fire is one part, the sun one part, the moon one part, and lightning one part. Dear one, this four-part quarter of Brahman is called Luminous.”
व्याख्या
पहले पाद का प्रकाशवान् और इस पाद का ज्योतिष्मान् अर्थ में निकट हैं, पर पाठ में अलग नाम हैं। यहाँ अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा और विद्युत् को गिनाने से ज्योति की प्रत्यक्ष छवियाँ सामने आती हैं।
Explanation
Radiant, the first quarter’s name, and Luminous, this quarter’s name, overlap in sense but are distinct Sanskrit labels. Here the list explicitly gathers visible forms of light: fire, sun, moon and lightning.
संदर्भ
तीसरा पाद चार प्रकाशमान शक्तियों का समूह है।
Context
The third quarter brings together four luminous powers.