Passage 62.3
ब्रह्मणः सोम्य ते पादं ब्रवाणीति ब्रवीतु मे भगवानिति तस्मै होवाच पृथिवी कलान्तरिक्षं कला द्यौः कला समुद्रः कलैष वै सोम्य चतुष्कलः पादो ब्रह्मणोऽनन्तवान्नाम ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[अग्निः आह—] सोम्य, ब्रह्मणः ते पादम् ब्रवाणि इति । [सत्यकामः आह—] भगवान् मे ब्रवीतु इति । [अग्निः] तस्मै ह उवाच—पृथिवी कला [अस्ति]; अन्तरिक्षम् कला [अस्ति]; द्यौः कला [अस्ति]; समुद्रः कला [अस्ति] । सोम्य, वै एषः ब्रह्मणः चतुष्कलः पादः अनन्तवान् नाम [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
अग्नि ने कहा: “प्रिय, मैं तुम्हें ब्रह्म का एक पाद बताऊँ।” उसने कहा: “भगवन्, मुझे बताइए।” अग्नि ने कहा: “पृथ्वी एक कला है, अन्तरिक्ष एक कला है, द्युलोक एक कला है और समुद्र एक कला है। प्रिय, ब्रह्म का यह चार कलाओं वाला पाद अनन्तवान् कहलाता है।”
English meaning
Fire said, “Dear one, let me tell you a quarter of Brahman.” He replied, “Please tell me, sir.” Fire said, “Earth is one part, the intermediate region one part, heaven one part, and the ocean one part. Dear one, this four-part quarter of Brahman is called Boundless.”
व्याख्या
अनन्तवान् का नाम सीमाहीन विस्तार का बोध देता है। पृथ्वी, अन्तरिक्ष, द्युलोक और समुद्र की सूची को पहले पाद की चार दिशाओं से न मिलाएँ; प्रत्येक पाद में चार अलग कलाएँ हैं।
Explanation
The name Anantavān evokes unbounded extension. Earth, the intermediate region, heaven and ocean form a new set of four, distinct from the directions in the first quarter.
संदर्भ
दिशाओं के बाद पृथ्वी से समुद्र तक व्यापक क्षेत्रों को दूसरे पाद में रखा जाता है।
Context
Following the directions, the second quarter gathers the great regions from earth to ocean.