Passage 149.4
न वधेनास्य हन्यते नास्य स्राम्येण स्रामो घ्नन्ति त्वेवैनं विच्छादयन्तीवाप्रियवेत्तेव भवत्यपि रोदितीव नाहमत्र भोग्यं पश्यामीत्येवमेवैष मघवन्निति होवाचैतं त्वेव ते भूयोऽनुव्याख्यास्यामि वसापराणि द्वात्रिꣳशतं वर्षाणीति स हापराणि द्वात्रिꣳशतं वर्षाण्युवास तस्मै होवाच ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अस्य वधेन न हन्यते; अस्य स्राम्येण स्रामः न [भवति] । तु एनम् घ्नन्ति एव, विच्छादयन्ति इव; अप्रियवेत्ता इव भवति, अपि रोदिति इव; अहम् अत्र भोग्यम् न पश्यामि इति । मघवन्, एषः एवम् एव इति ह उवाच । एतम् तु एव ते भूयः अनुव्याख्यास्यामि; अपराणि द्वात्रिंशतम् वर्षाणि वस इति । सः ह अपराणि द्वात्रिंशतम् वर्षाणि उवास । तस्मै ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
“इस शरीर के मारे जाने से वह नहीं मारा जाता और इसकी रोगग्रस्तता से रोगग्रस्त नहीं होता। फिर भी स्वप्न में लोग उसे मारते हैं; मानो उसे खदेड़ते हैं; वह मानो अप्रिय का अनुभव करता है और मानो रोता भी है। मुझे इसमें कोई कल्याणकारी उपलब्धि नहीं दिखती।” उन्होंने कहा, “मघवन्, इसकी दशा ऐसी ही है। पर मैं तुम्हें इसी आत्मा को और स्पष्ट करके बताऊँगा। और बत्तीस वर्ष रहो।” वह और बत्तीस वर्ष रहा। तब उन्होंने उससे कहा।
English meaning
“He is not killed by the killing of this body, nor afflicted by its affliction. Yet in the dream people strike him; they seem to drive him away. He seems to experience what is unpleasant and even to weep. I see no worthwhile fulfillment in this.” The teacher said, “Maghavan, it is indeed as you say. But I will explain this self to you further. Stay another thirty-two years.” He stayed another thirty-two years. Then the teacher addressed him.
व्याख्या
आपत्ति और उत्तर दोनों पूरे हैं। बत्तीस वर्षों का यह तीसरा चरण पहले दो चरणों सहित छियानवे वर्ष बनाता है; पाँच और वर्ष बाद में जुड़ेंगे। स्वप्न का अस्वीकार उसके अनुभव के अस्तित्व का निषेध नहीं, उसे अन्तिम आत्मज्ञान मानने का निषेध है।
Explanation
Both objection and response are complete. This third period brings the total to ninety-six years; five more will follow. Rejecting the dream account does not deny that dreams are experienced, but rejects taking them as final knowledge of the self.
संदर्भ
स्वप्न की सीमा स्वीकार कर बत्तीस वर्षों की तीसरी अवधि दी जाती है।
Context
Acknowledging the limitation of the dream account, the teacher assigns a third period of thirty-two years.