Passage 144.3
अथ यदनाशकायनमित्याचक्षते ब्रह्मचर्यमेव तदेष ह्यात्मा न नश्यति यं ब्रह्मचर्येणानुविन्दतेऽथ यदरण्यायनमित्याचक्षते ब्रह्मचर्यमेव तदरश्च ह वै ण्यश्चार्णवौ ब्रह्मलोके तृतीयस्यामितो दिवि तदैरं मदीयꣳ सरस्तदश्वत्थः सोमसवनस्तदपराजिता पूर्ब्रह्मणः प्रभुविमितꣳ हिरण्मयम् ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यत् अनाशकायनम् इति आचक्षते, तत् ब्रह्मचर्यम् एव [अस्ति]; हि यम् ब्रह्मचर्येण अनुविन्दते, एषः आत्मा न नश्यति । अथ यत् अरण्यायनम् इति आचक्षते, तत् ब्रह्मचर्यम् एव [अस्ति] । ह वै इतः तृतीयस्याम् दिवि ब्रह्मलोके अरः च ण्यः च अर्णवौ [स्तः] । तत् ऐरम् मदीयम् सरः [अस्ति]; तत् अश्वत्थः सोमसवनः [अस्ति]; तत् अपराजिता पूः [अस्ति]; ब्रह्मणः प्रभुविमितम् हिरण्मयम् [मण्डपम् अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जिसे “अनाशकायन”, अर्थात् उपवास का मार्ग, कहते हैं, वह ब्रह्मचर्य ही है, क्योंकि जिस आत्मा को ब्रह्मचर्य से पाया जाता है वह नष्ट नहीं होती। फिर जिसे “अरण्यायन”, अर्थात् वन की ओर जाना, कहते हैं, वह भी ब्रह्मचर्य है। यहाँ से तीसरे आकाशलोक में स्थित ब्रह्मलोक में “अर” और “ण्य” नाम के दो समुद्र हैं। वहाँ अन्नरस से पूर्ण, आनन्द देने वाला सरोवर है; वहाँ “सोमसवन” नाम का अश्वत्थ है; वहाँ ब्रह्मा की “अपराजिता” नगरी और प्रभु द्वारा निर्मित स्वर्णमय भवन है।
English meaning
What people call anāśakāyana, the way of fasting, is brahmacarya: the self discovered through brahmacarya does not perish. What they call araṇyāyana, going to the forest, is also brahmacarya. In Brahman’s world, in the third heaven from here, are the two oceans named Ara and Ṇya. There is the lake rich in nourishing essence and giving delight; there is the aśvattha tree called Somasavana; there are Brahmā’s city Aparājitā and the golden dwelling fashioned by the Lord.
व्याख्या
अनाशकायन को न-नाश और अरण्यायन को अर-ण्य से जोड़ा गया है। सरोवर को “ऐरं मदीयम्” या एक संयुक्त नाम “ऐरंमदीय” समझने के विकल्प हैं। सोमसवन का नाम और सोम देने वाले वृक्ष का संकेत दोनों सम्भव हैं। समुद्र, सरोवर, वृक्ष, नगरी और भवन सब धार्मिक विश्व-चित्र हैं, भौगोलिक या स्वास्थ्य सम्बन्धी निर्देश नहीं।
Explanation
Anāśakāyana is associated with non-perishing, and araṇyāyana with Ara and Ṇya. The lake’s description may be read as airaṃ madīyam or as the name Airammadīya. Somasavana may be a name and also suggest a soma-yielding tree. Oceans, lake, tree, city, and dwelling are religious cosmography, not geographical or health instructions.
संदर्भ
ब्रह्मचर्य की स्तुति उपवास और वनवास से होते हुए ब्रह्मलोक के चित्र तक पहुँचती है।
Context
The praise of brahmacarya moves from fasting and forest life to a depiction of Brahman’s world.