Passage 14.4
स य एतदेवं विद्वान्साधु सामेत्युपास्तेऽभ्याशो ह यदेनꣳसाधवो धर्मा आ च गच्छेयुरुप च नमेयुः ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः यः एतत् एवम् विद्वान् साधु साम इति उपास्ते, एनम् साधवः धर्माः अभ्याशः ह यत् आ च गच्छेयुः उप च नमेयुः ।
हिन्दी अर्थ
जो इसे इस प्रकार जानकर साम की उपासना साधु के रूप में करता है, उसके पास शुभ गुण और अनुकूल स्थितियाँ आने तथा उसके अनुकूल होने की सम्भावना निकट होती है।
English meaning
For one who understands this and contemplates the Sāman as good, good qualities and favourable conditions are likely to approach and incline toward him.
व्याख्या
अभ्याशः निकटता या प्रबल सम्भावना बताता है। साधु साम का शुभ और अनुकूल रूप है; यह अर्थ आगे साधवो धर्माः से भी स्पष्ट होता है। स्रोत की विद्वान्साधु वर्तनी का संशोधन अलग से प्रमाणित और दर्ज है।
Explanation
Abhyāśaḥ indicates proximity or likelihood. Sādhu presents the Sāman as good and favourable, reinforced by the later phrase sādhavo dharmāḥ. The source spelling vidvān sādhu has been separately repaired with recorded evidence.
संदर्भ
दूसरा अध्याय साम के समग्र रूप की उपासना आरम्भ करता है। पहले साम शब्द को साधु, कल्याणकारी और अनुकूल व्यवहार से जोड़ा जाता है।
Context
The second adhyāya begins contemplation of the Sāman as a whole, first connecting the word with what is good, beneficial and conciliatory.