Passage 113.2
अथ यदि तस्याकर्ता भवति तत एव सत्यमात्मानं कुरुते स सत्याभिसन्धः सत्येनात्मानमन्तर्धाय परशुं तप्तं प्रतिगृह्णाति सन दह्यतेऽथ मुच्यते ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यदि [सः] तस्य अकर्ता भवति, ततः एव आत्मानम् सत्यम् कुरुते । सः सत्याभिसन्धः सत्येन आत्मानम् अन्तर्धाय तप्तम् परशुम् प्रतिगृह्णाति; सः न दह्यते, अथ मुच्यते ।
हिन्दी अर्थ
“पर यदि उसने वह काम नहीं किया है, तो वह अपने को सत्य बनाता है। सत्य का आश्रय लेकर, अपने को सत्य से ढककर वह तप्त कुल्हाड़ी पकड़ता है। वह नहीं जलता और फिर छोड़ दिया जाता है।”
English meaning
“But if he has not done it, he makes himself true. Intent on truth and covering himself with truth, he takes hold of the heated axe. He is not burned and is then released.”
व्याख्या
न जलने का कथन कथा की मान्यता है, सत्यनिष्ठ व्यक्ति के लिए ताप से सुरक्षा का तथ्य नहीं। सत्य और मुक्ति का सम्बन्ध उपमा का लक्ष्य है। इस अंश को जोखिमपूर्ण परीक्षा के समर्थन में उपयोग नहीं करना चाहिए।
Explanation
The claim of not being burned belongs to the story’s premise, not to a fact that truthfulness protects against heat. The analogy concerns truth and release, and should not be used to support a dangerous ordeal.
संदर्भ
असत्य के उदाहरण का सत्यनिष्ठ प्रतिरूप सामने रखा जाता है।
Context
The truth-aligned counterpart to the preceding falsehood example is presented.