Passage 109.2
तँ होवाच यं वै सोम्यैतमणिमानं न निभालयस एतस्य वै सोम्यैषोऽणिम्न एवं महान्यग्रोधस्तिष्ठति श्रद्धत्स्व सोम्येति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[पिता] तम् ह, सोम्य, यम् वै एतम् अणिमानम् न निभालयसे, सोम्य, एतस्य वै अणिम्नः एवम् एषः महान् न्यग्रोधः [उत्पन्नः] तिष्ठति; सोम्य, श्रद्धत्स्व इति उवाच ।
हिन्दी अर्थ
उन्होंने उससे कहा, “प्रिय, इस सूक्ष्म सार को तुम देख नहीं पा रहे हो; पर इसी सूक्ष्म सार से यह इतना बड़ा बरगद खड़ा है। प्रिय, इस बात पर विश्वास रखो।”
English meaning
He said to him, “My dear, you do not perceive this subtle essence; yet from this very subtle essence stands this great banyan tree. Trust this, my dear.”
व्याख्या
अणिमान् यहाँ सूक्ष्मता या सूक्ष्म सार है, डीएनए अथवा आधुनिक परमाणु का नाम नहीं। श्रद्धत्स्व विचाराधीन शिक्षा पर भरोसा करने का आग्रह है; इसे अपने आप किसी आधुनिक वैज्ञानिक पहचान की पुष्टि न माना जाए।
Explanation
Aṇiman denotes fineness or a subtle essence, not DNA or a modern atom. Śraddhatsva asks for trust in the teaching under discussion; it does not itself verify a modern scientific identification.
संदर्भ
अदृश्य सूक्ष्म आधार और विशाल दृश्य वृक्ष का सम्बन्ध स्पष्ट किया जाता है।
Context
The connection between an unseen subtle basis and the large visible tree is made explicit.