Passage 102.4
अन्नमयँहि सोम्य मनः आपोमयः प्राणस्तेजोमयी वागिति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[पिता], सोम्य, मनः हि अन्नमयम् [अस्ति]; प्राणः आपोमयः [अस्ति]; वाक् तेजोमयी [अस्ति] इति [उवाच] । [सः], भगवान् मा भूयः एव विज्ञापयतु इति [उवाच] । [पिता], तथा, सोम्य इति ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
“क्योंकि, प्रिय, मन अन्नमय है, प्राण जलमय है और वाणी तेजोमयी है।” श्वेतकेतु ने कहा, “भगवन्, मुझे और समझाइए।” उन्होंने कहा, “ऐसा ही होगा, प्रिय।”
English meaning
“For, my dear, mind is made of food, vital breath of water, and speech of heat.” Śvetaketu said, “Please, sir, make me understand further.” He replied, “So I shall, my dear.”
व्याख्या
मय प्रत्यय को इस प्रसंग में “से बना” कहा गया है; पोषण-निर्भरता पर बल देने वाली व्याख्या भी सम्भव है। यह सार आगे दही और उपवास के दृष्टान्तों से समझाया जाता है, केवल नारा बनकर नहीं रह जाता।
Explanation
The suffix -maya is rendered here as “made of”; an interpretation emphasizing dependence for nourishment is also possible. The curd and fasting examples develop the statement rather than leaving it as a slogan.
संदर्भ
तीन प्रक्रियाओं का सार सुनकर पुत्र और स्पष्टीकरण माँगता है।
Context
Hearing the summary of the three processes, the son asks for further clarification.