Passage 100.4
तासां त्रिवृतं त्रिवृतमेकैकामकरोद्यथा तु खलु सोम्येमास्तिस्रो देवतास्त्रिवृत्त्रिवृदेकैका भवति तन्मे विजानीहीति ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[सा] तासाम् एकैकाम् त्रिवृतम् त्रिवृतम् अकरोत् । सोम्य, यथा तु खलु इमाः तिस्रः देवताः एकैका त्रिवृत् त्रिवृत् भवति, तत् मे [निगदतः] विजानीहि इति ।
हिन्दी अर्थ
“उसने उनमें से प्रत्येक को तीन-तीन का मिश्रण बनाया। प्रिय, अब मुझसे समझो कि इन तीन देवताओं में से प्रत्येक किस तरह तीन-तीन का होता है।”
English meaning
“It made each of them threefold. Now, my dear, learn from me how each of these three deities is threefold.”
व्याख्या
अकरोत् सम्पन्न क्रिया है, जबकि विजानीहि शिक्षार्थी को समझने का निमन्त्रण है। त्रिवृत् की पुनरावृत्ति हर तत्त्व पर समान नियम लागू करती है, केवल कुल तीन तत्त्व गिनती नहीं है।
Explanation
Akarot narrates the completed action, while vijānīhi invites the pupil to understand it. Repeated trivṛt applies the same threefold character to each element, rather than merely counting three elements overall.
संदर्भ
त्रिवृत्करण की घोषणा से उसके दृश्य उदाहरणों की ओर संक्रमण होता है।
Context
The declaration of threefold combination leads into visible examples.