Passage 150.3
एवमेवैष मघवन्निति होवाचैतं त्वेव ते भूयोऽनुव्याख्यास्यामि नो एवान्यत्रैतस्माद्वसापराणि पञ्च वर्षाणीति स हापराणि पञ्च वर्षाण्युवास तान्येकशतꣳ संपेदुरेतत्तद्यदाहुरेकशतꣳ ह वै वर्षाणि मघवान्प्रजापतौ ब्रह्मचर्यमुवास तस्मै होवाच ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
मघवन्, एषः एवम् एव इति ह उवाच । एतम् तु एव ते भूयः अनुव्याख्यास्यामि; एतस्मात् अन्यत्र उ एव न [अनुव्याख्यास्यामि] । अपराणि पञ्च वर्षाणि वस इति । सः ह अपराणि पञ्च वर्षाणि उवास । तानि एकशतम् सम्पेदुः । एतत् तत् यत् आहुः—मघवान् प्रजापतौ एकशतम् ह वै वर्षाणि ब्रह्मचर्यम् उवास । तस्मै ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
उन्होंने कहा, “मघवन्, इसकी दशा ऐसी ही है। पर मैं तुम्हें इसी को और स्पष्ट करूँगा, इससे भिन्न किसी अन्य को नहीं। और पाँच वर्ष रहो।” वह और पाँच वर्ष रहा। ये वर्ष कुल एक सौ एक हुए। यही वह बात है जिसके विषय में लोग कहते हैं, “मघवान् ने प्रजापति के यहाँ एक सौ एक वर्ष ब्रह्मचर्य में बिताए।” तब उन्होंने उससे कहा।
English meaning
He said, “Maghavan, it is indeed as you say. But I will explain this very self to you further, not something other than this. Stay another five years.” He stayed another five years. The years came to a hundred and one. This is what people mean when they say, “Maghavan lived as a disciplined student with Prajāpati for a hundred and one years.” Then the teacher addressed him.
व्याख्या
“इससे भिन्न नहीं” एक महत्त्वपूर्ण वाक्य है: प्रत्येक चरण में कोई नया आत्मा नहीं खोजा जा रहा। बत्तीस की तीन अवधियाँ और पाँच वर्ष मिलकर एक सौ एक होते हैं। कथावाचक की टिप्पणी और गुरु का नया कथन अलग हैं।
Explanation
“Not other than this” is important: a different self is not being discovered at each stage. Three periods of thirty-two plus five make 101. The narrator’s comment is distinct from the teacher’s next speech.
संदर्भ
अन्तिम पाँच वर्षों के साथ दीर्घ शिक्षा का कुल काल स्पष्ट किया जाता है।
Context
The final five years establish the total duration of the long apprenticeship.