Passage 108.2
अस्य यदेकाँ शाखां जीवो जहात्यथ सा शुष्यति द्वितीयां जहात्यथ सा शुष्यति तृतीयां जहात्यथ सा शुष्यति सर्वं जहाति सर्वः शुष्यत्येवमेव खलु सोम्य विद्धीति होवाच ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
जीवः अस्य यत् एकाम् शाखाम् जहाति, अथ सा शुष्यति । [जीवः] द्वितीयाम् [शाखाम्] जहाति, अथ सा शुष्यति । [जीवः] तृतीयाम् [शाखाम्] जहाति, अथ सा शुष्यति । [जीवः] सर्वम् [वृक्षम्] जहाति, सर्वः [वृक्षः] शुष्यति । [पिता], सोम्य, एवम् एव खलु विद्धि इति ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
“जब जीव इस वृक्ष की एक शाखा को छोड़ देता है, वह सूख जाती है; दूसरी को छोड़ता है, वह सूख जाती है; तीसरी को छोड़ता है, वह सूख जाती है। जब पूरे वृक्ष को छोड़ देता है, पूरा वृक्ष सूख जाता है। प्रिय, इसी प्रकार समझो,” उन्होंने कहा।
English meaning
“When the living principle leaves one branch of this tree, that branch dries up. When it leaves a second, that one dries up; when it leaves a third, that one dries up. When it leaves the entire tree, the whole tree dries up. Understand it in just this way, my dear,” he said.
व्याख्या
एक, दूसरी और तीसरी शाखा के बाद सम्पूर्ण वृक्ष आता है। क्रम को संक्षेप में बदलने की बजाय पूरा रखा गया है। जीवन के चले जाने का यह वर्णन पाठ की आत्मा-सम्बन्धी शिक्षा का भाग है।
Explanation
One, second, and third branches are followed by the entire tree. The sequence is retained in full rather than compressed. This account of life’s departure belongs to the text’s teaching about self.
संदर्भ
शाखाओं के सूखने से जीवन और जीवित देह का भेद समझाया जाता है।
Context
The drying branches illustrate a distinction between life and the living body.