Passage 95.2
समाने तृप्यति मनस्तृप्यति मनसि तृप्यति पर्जन्यस्तृप्यति पर्जन्ये तृप्यति विद्युत्तृप्यति विद्युति तृप्यन्त्यां यत्किञ्च विद्युच्च पर्जन्यश्चाधितिष्ठतस्तत्तृप्यति तस्यानु तृप्तिं तृप्यति प्रजया पशुभिरन्नाद्येन तेजसा ब्रह्मवर्चसेनेति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
समाने तृप्यति मनः तृप्यति; मनसि तृप्यति पर्जन्यः तृप्यति; पर्जन्ये तृप्यति विद्युत् तृप्यति; विद्युति तृप्यन्त्याम् विद्युत् च पर्जन्यः च यत् किञ्च अधितिष्ठतः, तत् तृप्यति । तस्य तृप्तिम् अनु [सः] प्रजया पशुभिः अन्नाद्येन तेजसा ब्रह्मवर्चसेन तृप्यति इति ।
हिन्दी अर्थ
समान के तृप्त होने पर मन को तृप्ति मिलती है; मन की तृप्ति पर पर्जन्य को तृप्ति मिलती है; पर्जन्य की तृप्ति पर बिजली को तृप्ति मिलती है। बिजली की तृप्ति होने पर जिस किसी पर बिजली और पर्जन्य अधिष्ठित हैं, वह सब तृप्त होता है। उसकी तृप्ति के साथ उपासक सन्तान, पशुओं, अन्न-भोग, तेज और वैदिक विद्या के तेज से तृप्त होता है।
English meaning
When samāna is satisfied, mind is satisfied; when mind is satisfied, Parjanya is satisfied; when Parjanya is satisfied, lightning is satisfied. When lightning is satisfied, everything over which lightning and Parjanya preside is satisfied. Following that satisfaction, the contemplator is satisfied with offspring, livestock, the enjoyment of food, radiance, and the radiance of sacred learning.
व्याख्या
समान, मन, पर्जन्य और बिजली इस पद की विशिष्ट कड़ी हैं। अन्त में पाँच फल अलग हैं; तेज और ब्रह्मवर्चस् समानार्थी मानकर एक नहीं किए गए हैं। यह उपासना की विश्व-शरीर समानता है, शारीरिक क्रिया का वैज्ञानिक मानचित्र नहीं।
Explanation
Samāna, mind, Parjanya and lightning form this passage’s distinctive sequence. Five results follow; radiance and the radiance of sacred learning are not treated as identical. These are contemplative body–cosmos correspondences, not a scientific map of physiology.
संदर्भ
समान का सम्बन्ध मन और वर्षा-बिजली की शक्तियों से बनता है।
Context
Samāna is related to mind and the powers of rain and lightning.