Shloka 18.68
य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति । भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः ॥१८-६८॥
पदच्छेद
यःyaḥइमम्imamपरमम्paramamगुह्यम्guhyamमद्भक्तेषुmadbhakteṣuअभिधास्यतिabhidhāsyatiभक्तिम्bhaktimमयिmayiपराम्parāmकृत्वाkṛtvāमाम्māmएवevaएष्यतिeṣyatiअसंशयःasaṃśayaḥ
अन्वय
यः मयि पराम् भक्तिम् कृत्वा इमम् परमम् गुह्यम् मद्भक्तेषु अभिधास्यति, [सः] असंशयः [सन्] माम् एव एष्यति ।
हिन्दी अर्थ
जो मेरी परम भक्ति रखते हुए यह अत्यंत गूढ़ शिक्षा मेरे भक्तों को समझाएगा, वह निस्संदेह मुझे ही प्राप्त होगा।
English meaning
One who, with supreme devotion to me, explains this highest secret among my devotees will certainly come to me.
प्रसंग
तैयार श्रोताओं में उपदेश कहने वाले की भक्ति अब प्रशंसित होती है।
सरल व्याख्या
साझा करना केवल शब्द पहुँचाना नहीं; कहने वाले की भक्ति और निष्ठा भी इस कथन में शामिल हैं।
Context
Devotion in sharing the teaching among receptive devotees is now praised.
Simple explanation
Transmission is more than passing on words; the speaker's devotion and commitment are part of the statement.