Passage 24.1
जनकं ह वैदेहं याज्ञवल्क्यो जगाम । समेनेन वदिष्य इति । अथ ह यज्जनकश्च वैदेहो याज्ञवल्क्यश्चाग्निहोत्रे समूदाते । तस्मै ह याज्ञवल्क्यो वरं ददौ । स ह कामप्रश्नमेव वव्रे । तं हास्मै ददौ । तं ह सम्राडेव पूर्वः पप्रच्छ ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
याज्ञवल्क्यः ह जनकम् वैदेहम् जगाम । सः मेने—न [अनेन] वदिष्ये इति । अथ ह यत् जनकः च वैदेहः याज्ञवल्क्यः च अग्निहोत्रे समूदाते, [तदा] याज्ञवल्क्यः तस्मै ह वरम् ददौ । सः ह कामप्रश्नम् एव वव्रे । [याज्ञवल्क्यः] तम् ह अस्मै ददौ । सम्राट् एव तम् ह पूर्वः पप्रच्छ ।
हिन्दी अर्थ
याज्ञवल्क्य जनक वैदेह के पास गए, यह सोचकर कि मैं बोलूँगा नहीं। लेकिन पहले जब जनक और याज्ञवल्क्य ने अग्निहोत्र पर साथ चर्चा की थी, तब याज्ञवल्क्य ने उन्हें वर दिया था। जनक ने अपनी इच्छा के प्रश्न पूछने का वर माँगा, और वह उन्हें मिल गया था। इसलिए सम्राट् ने ही पहले प्रश्न किया।
English meaning
Yajnavalkya went to Janaka of Videha, thinking, “I shall not speak.” But on an earlier occasion, when they had discussed the Agnihotra together, Yajnavalkya had offered him a boon. Janaka chose the freedom to ask whatever questions he wished, and Yajnavalkya granted it. The king therefore questioned him first.
व्याख्या
याज्ञवल्क्य का मौन रहने का विचार जनक के पहले से मिले वर को समाप्त नहीं करता। कामप्रश्न इच्छा से पूछने का अधिकार है, केवल कामना-विषयक प्रश्न नहीं।
Explanation
Yajnavalkya’s intention to remain silent does not cancel Janaka’s earlier boon. Kamaprashna means freely chosen questions, not merely questions about desire.
संदर्भ
पहले दिया हुआ प्रश्नाधिकार इस नए संवाद का आरम्भ कराता है।
Context
A previously granted freedom to question initiates the new dialogue.