Passage 5.1
यत्सप्तान्नानि मेधया तपसाजनयत्पिता । एकमस्य साधारणं द्वे देवानभाजयत् । त्रीण्यात्मनेऽकुरुत पशुभ्य एकं प्रायच्छत् । तस्मिन् सर्वं प्रतिष्ठितं यच्च प्राणिति यच्च न । कस्मात्तानि न क्षीयन्ते अद्यमानानि सर्वदा । यो वै तामक्षितिं वेद सोऽन्नमत्ति प्रतीकेन । स देवानपिगच्छति स ऊर्जमुपजीवति । इति श्लोकाः ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
पिता मेधया तपसा यत् सप्त अन्नानि अजनयत्, [तानि प्रकाशयिष्यामः] । अस्य [भोक्तृसमुदायस्य] एकम् साधारणम् [अकरोत्]; द्वे देवान् अभाजयत् । त्रीणि आत्मने अकुरुत; पशुभ्यः एकम् प्रायच्छत् । यत् च प्राणिति यत् च न [प्राणिति], सर्वम् तस्मिन् [पयसि] प्रतिष्ठितम् [अस्ति] । तानि सर्वदा अद्यमानानि कस्मात् न क्षीयन्ते? यः वै ताम् अक्षितिम् वेद, सः प्रतीकेन अन्नम् अत्ति । सः देवान् अपिगच्छति; सः ऊर्जम् उपजीवति इति श्लोकाः ।
हिन्दी अर्थ
पिता ने मेधा और तप से सात अन्न उत्पन्न किए। एक उसका सबके लिए साझा था; दो उसने देवताओं को बाँटे। तीन अपने लिए बनाए और एक पशुओं को दिया। उसी में सब प्रतिष्ठित है, जो साँस लेता है और जो नहीं। निरन्तर खाए जाने पर भी वे नष्ट क्यों नहीं होते? जो उनकी इस अक्षयता को जानता है, वह प्रतीक, अर्थात् मुख, से अन्न खाता है। वह देवताओं तक पहुँचता और पोषण-शक्ति पर जीवित रहता है। ये श्लोक हैं।
English meaning
The father produced seven foods through intelligence and austerity. One was common to all; two he allotted to the gods. Three he made for himself, and one he gave to animals. In that everything is established, both what breathes and what does not. Why do these foods not run out, though they are continually eaten? Whoever knows their inexhaustibility eats food with the pratika, the mouth. That person reaches the gods and lives on nourishment. These are the verses.
व्याख्या
अन्न यहाँ केवल भोजन पदार्थ नहीं बल्कि देवता, पशु और जीवन-शक्तियों का पोषण भी है। सात का विभाजन एक, दो, तीन और एक में है। प्रतीक का मुख-अर्थ अगला अनुच्छेद स्वयं देता है; स्रोत के ऊऋजम् जैसे रूप की वर्तनी समीक्षा अपेक्षित है।
Explanation
Food here encompasses nourishment for gods, animals and vital powers, not only edible substances. The seven are distributed as one, two, three and one. The next passage itself explains pratika as the mouth. The base’s anomalous spelling for urj, nourishment, remains a transcription issue.
संदर्भ
पाँचवाँ ब्राह्मण सात प्रकार के अन्न पर श्लोक रखकर शुरू होता है; अगले अनुच्छेद उनकी विस्तार से व्याख्या करते हैं।
Context
The fifth brahmana opens with verses about seven foods, which the following prose explains in detail.