Passage 24.37
तद्यथा राजानमायन्तमुग्राः प्रत्येनसः सूतग्रामण्योऽन्नैः पानैरवसथैः प्रतिकल्पन्तेऽयमायात्ययमागच्छतीति । एवं हैवंविदं सर्वाणि भूतानि प्रतिकल्पन्त इदं ब्रह्मायातीदमागच्छतीति ॥ ३७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् यथा आयन्तम् राजानम् उग्राः प्रत्येनसः सूतग्रामण्यः अन्नैः पानैः अवसथैः प्रतिकल्पन्ते—अयम् आयाति, अयम् आगच्छति इति—एवम् ह सर्वाणि भूतानि एवम् विदम् प्रतिकल्पन्ते—इदम् ब्रह्म आयाति, इदम् आगच्छति इति ।
हिन्दी अर्थ
जैसे आते हुए राजा के लिए उग्र अधिकारी, प्रहरी, सूत और ग्रामणी अन्न, पेय और निवास तैयार करते हैं, कहते हुए कि वह आ रहा है, वह पहुँच रहा है, वैसे ही सभी प्राणी ऐसे ज्ञाता के लिए तैयारी करते हैं: यह ब्रह्म आ रहा है, यह पहुँच रहा है।
English meaning
As officers, guards, charioteers and village chiefs prepare food, drink and lodging for an approaching king, saying “He is coming, he is arriving,” so all beings prepare for one who knows in this way: “This brahman is coming; it is arriving.”
व्याख्या
कथन मृत्यु-यात्रा के प्रसंग में प्राणियों और कर्मफल की व्यवस्था दिखाता है। राजकीय सेवकों के नाम प्राचीन पद हैं; उन्हें आधुनिक प्रशासनिक पदों से हूबहू न मिलाएँ।
Explanation
Within the departure narrative, the image depicts beings and the arrangement of results of action. The servants’ titles are historical and do not map exactly onto modern administrative jobs.
संदर्भ
राजा के स्वागत से नई अवस्था की प्राप्ति का रूपक बनाया जाता है।
Context
A royal reception illustrates arrival into another condition.