Passage 15.1
अथ हैनं भुज्युर्लाह्यायनिः पप्रच्छ याज्ञवल्क्येति होवाच मद्रेषु चरकाः पर्यव्रजाम । ते पतञ्चलस्य काप्यस्य गृहानैम । तस्यासीद्दुहिता गन्धर्वगृहीता । तमपृच्छाम कोऽसीति । सोऽब्रवीत्सुधन्वाङ्गिरस इति । तं यदा लोकानामन्तानपृच्छाम । अथैनमब्रूम क्व पारिक्षिता अभवन्निति । क्व पारिक्षिता अभवन् । स त्वा पृच्छामि याज्ञवल्क्य । क्व पारिक्षिता अभवन्निति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ ह लाह्यायनिः भुज्युः एनम् पप्रच्छ । [सः] ह उवाच—याज्ञवल्क्य, [वयम्] चरकाः मद्रेषु पर्यव्रजाम । ते [वयम्] काप्यस्य पतञ्चलस्य गृहान् ऐम । तस्य गन्धर्वगृहीता दुहिता आसीत् । [वयम्] तम् अपृच्छाम—कः असि इति । सः अब्रवीत्—सुधन्वा आङ्गिरसः [अस्मि] इति । यदा तम् लोकानाम् अन्तान् अपृच्छाम, अथ एनम् अब्रूम—पारिक्षिताः क्व अभवन् इति । पारिक्षिताः क्व अभवन् । याज्ञवल्क्य, सः [अहम्] त्वा पृच्छामि—पारिक्षिताः क्व अभवन् इति ।
हिन्दी अर्थ
तब लाह्य के वंशज भुज्यु ने पूछा: याज्ञवल्क्य, हम अध्ययन के लिए घूमते हुए मद्र देश गए थे और कपि के वंशज पतञ्चल के घर पहुँचे। उनकी एक पुत्री थी जिसे गन्धर्व ने आविष्ट किया था। हमने उस गन्धर्व से पूछा: तुम कौन हो? उसने कहा: मैं आङ्गिरस सुधन्वा हूँ। जब हमने उससे लोकों की सीमाओं के विषय में पूछा, तब यह भी कहा: परीक्षित के वंशज कहाँ गए? वे पारिक्षित कहाँ गए? अब मैं तुमसे पूछता हूँ, याज्ञवल्क्य: वे पारिक्षित कहाँ गए?
English meaning
Then Bhujyu of the Lahya lineage asked, “Yajnavalkya, we were travelling as students in the country of the Madras and came to the house of Patanchala of the Kapi lineage. He had a daughter possessed by a gandharva. We asked that being, ‘Who are you?’ It said, ‘I am Sudhanvan of the Angiras lineage.’ While asking about the limits of the worlds, we also asked, ‘Where did the descendants of Parikshit go?’ Where did those Parikshitas go? I now ask you, Yajnavalkya: where did those Parikshitas go?”
व्याख्या
गन्धर्व-आवेश कथा की अपनी व्याख्या है, किसी स्त्री की आधुनिक चिकित्सकीय पहचान नहीं। पुनरुक्त प्रश्न बताता है कि पारिक्षितों की मरणोत्तर गति ज्ञान की परीक्षा का केन्द्र है।
Explanation
Possession by a gandharva is the narrative’s own description, not a modern clinical diagnosis of the woman. The repeated question makes the Parikshitas’ postmortem destination the test of knowledge.
संदर्भ
भुज्यु अपने भ्रमण में प्राप्त अलौकिक ज्ञान का प्रसंग रखकर परीक्षा लेते हैं।
Context
Bhujyu tests Yajnavalkya through a report of extraordinary knowledge acquired on his travels.