Passage 24.12
प्राणेन रक्षन्नवरं कुलायं बहिष्कुलायादमृतश्चरित्वा । स ईयतेऽमृतो यत्रकामं हिरण्मयः पुरुष एकहंसः ॥ १२ ॥
पदच्छेद
अन्वय
प्राणेन अवरम् कुलायम् रक्षन्, कुलायात् बहिः अमृतः चरित्वा, सः अमृतः हिरण्मयः पुरुषः एकहंसः यत्रकामम् ईयते ।
हिन्दी अर्थ
प्राण से नीचे के घोंसले, शरीर, की रक्षा करते हुए, अमर पुरुष घोंसले के बाहर विचरकर जहाँ इच्छा हो वहाँ जाता है, वह स्वर्णमय पुरुष, अकेला हंस।
English meaning
Guarding the lower nest, the body, through breath, the immortal ranges beyond the nest and goes where it wishes: the golden person, the solitary swan.
व्याख्या
प्राण शरीर को जीवित बनाए रखता है, जबकि स्वप्न में अनुभव अलग स्थलों पर जाता लगता है। इसे सत्यापित शरीर-त्याग या शरीर से बाहर यात्रा की तकनीक न समझें।
Explanation
Breath sustains bodily life while dream experience seems to range elsewhere. The image is not a verified account or technique of out-of-body travel.
संदर्भ
घोंसले और हंस की छवि शरीर तथा स्वप्नगत पुरुष के भेद को आगे बढ़ाती है।
Context
The nest and swan extend the distinction between body and dreaming person.