Passage 24.10
न तत्र रथा न रथयोगा न पन्थानो भवन्ति । अथ रथान् रथयोगान् पथः सृजते । न तत्रानन्दा मुदः प्रमुदो भवन्ति । अथानन्दान्मुदः प्रमुदः सृजते । न तत्र वेशान्ताः पुष्करिण्यः स्रवन्त्यो भवन्ति । अथ वेशान्तान् पुष्करिणीः स्रवन्तीः सृजते । स हि कर्ता ॥ १० ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत्र रथाः न, रथयोगाः न, पन्थानः न भवन्ति । अथ [सः] रथान् रथयोगान् पथः सृजते । तत्र आनन्दाः मुदः प्रमुदः न भवन्ति । अथ [सः] आनन्दान् मुदः प्रमुदः सृजते । तत्र वेशान्ताः पुष्करिण्यः स्रवन्त्यः न भवन्ति । अथ [सः] वेशान्तान् पुष्करिणीः स्रवन्तीः सृजते । हि सः कर्ता [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
वहाँ वास्तविक रथ, रथ के जुए हुए साधन और रास्ते नहीं होते; फिर भी वह रथ, रथ-साधन और रास्ते रचता है। वहाँ आनन्द, मुद और प्रमोद नहीं होते; फिर भी वह उन्हें रचता है। वहाँ छोटे तालाब, कमल-सरोवर और बहती नदियाँ नहीं होतीं; फिर भी वह उन्हें रचता है, क्योंकि वही कर्ता है।
English meaning
There are no actual chariots, teams or roads there, yet it creates chariots, teams and roads. There are no joys, delights or great delights there, yet it creates them. There are no pools, lotus ponds or flowing rivers there, yet it creates them, for it is the maker.
व्याख्या
हर सूची में बाहरी वस्तु का अभाव और स्वप्न में उसकी प्रस्तुति साथ रखे गए हैं। कर्ता कहना यहाँ स्वप्न की रचना का प्रसंग है, जाग्रत जगत् की हर घटना को निजी मन द्वारा बनाया बताना नहीं।
Explanation
Each list contrasts absent external objects with present dream appearances. Being the maker refers here to dreaming, not to a claim that one’s private mind manufactures every waking event.
संदर्भ
स्वप्न-रचना के उदाहरण यात्रा, सुख और जलस्थलों से दिए जाते हैं।
Context
Dream-construction is illustrated through travel, pleasure and waterscapes.