Passage 32.1
आप एवेदमग्र आसुः । ता आपः सत्यमसृजन्त । सत्यं ब्रह्म । ब्रह्म प्रजापतिम् । प्रजापतिर्देवान् । ते देवाः सत्यमेवोपासते । तदेतत्त्र्यक्षरं सतियमिति स इत्येकमक्षरम् । तीत्येकमक्षरम् । यमित्येकमक्षरम् । प्रथमोत्तमे अक्षरे सत्यं मध्यतोऽनृतम् । तदेतदनृतमुभयतः सत्येन परिगृहीतम् । सत्यभूयमेव भवति । नैवंविद्वांसमनृतं हिनस्ति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अग्रे इदम् आपः एव आसुः । ताः आपः सत्यम् असृजन्त । सत्यम् ब्रह्म [अस्ति] । ब्रह्म प्रजापतिम् [असृजत]; प्रजापतिः देवान् [असृजत] । ते देवाः सत्यम् एव उपासते । सतियम् इति तत् एतत् त्र्यक्षरम् [अस्ति] । स इति एकम् अक्षरम् [अस्ति]; ती इति एकम् अक्षरम् [अस्ति]; यम् इति एकम् अक्षरम् [अस्ति] । प्रथमोत्तमे अक्षरे सत्यम् [स्तः]; मध्यतः अनृतम् [अस्ति] । तत् एतत् अनृतम् उभयतः सत्येन परिगृहीतम् [अस्ति]; [तत्] सत्यभूयम् एव भवति । अनृतम् एवम्विद्वांसम् न हिनस्ति ।
हिन्दी अर्थ
आरम्भ में यह सब जल ही था। उन जलों ने सत्य को उत्पन्न किया; सत्य ने ब्रह्म को, ब्रह्म ने प्रजापति को और प्रजापति ने देवताओं को उत्पन्न किया। वे देवता सत्य की ही उपासना करते हैं। “सतियम्” नाम के तीन अक्षर हैं: “स” एक अक्षर, “ति” एक अक्षर और “यम्” एक अक्षर है। पहला और अन्तिम अक्षर सत्य हैं; बीच में अनृत है। इस प्रकार अनृत दोनों ओर से सत्य से घिरा हुआ है और सत्य की ही प्रधानता हो जाती है। इस प्रकार जानने वाले को अनृत हानि नहीं पहुँचाता।
English meaning
In the beginning all this was water. Those waters produced truth; truth produced Brahman, Brahman produced Prajapati, and Prajapati produced the gods. Those gods contemplate truth itself. The name satiyam is treated as three syllables: sa is one, ti is one, and yam is one. The first and last syllables are truth; untruth lies in the middle. Thus untruth is enclosed by truth on both sides, and truth predominates. Untruth does not injure one who knows in this way.
व्याख्या
सत्यम् को यहाँ जानबूझकर सतियम् के तीन अक्षरों में पढ़ा गया है। दो बाहरी अक्षरों का सत्य और बीच का अनृत होना एक उपासनात्मक व्यवस्था है। यह झूठ बोलने की छूट या उससे होने वाली वास्तविक हानि के नकार का कथन नहीं माना गया है।
Explanation
Satyam is deliberately presented here as the three-syllable satiyam. Assigning truth to the outer syllables and untruth to the middle is a contemplative arrangement. It should not be turned into permission to lie or a denial of the actual harm falsehood can cause.
संदर्भ
सत्य-ब्रह्म की घोषणा अब एक सृष्टि-क्रम और शब्द-चिन्तन से जुड़ती है। पानी, सत्य, ब्रह्म, प्रजापति और देवता क्रम से आते हैं।
Context
The declaration concerning truth and Brahman is now developed through a sequence of origins and a contemplation of a word. Water, truth, Brahman, Prajapati and the gods appear in order.