Passage 6.1
त्रयं वा इदं नाम रूपं कर्म । तेषां नाम्नां वागित्येतदेषामुक्थम् । अतो हि सर्वाणि नामान्युत्तिष्ठन्ति । एतदेषां साम । एतद्धि सर्वैर्नामभिः समम् । एतदेषां ब्रह्म । एतद्धि सर्वाणि नामानि बिभर्ति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
इदम् वा त्रयम् [अस्ति]-नाम रूपम् कर्म [च] । तेषाम् नाम्नाम् वाक् इति एतत् एषाम् उक्थम् [अस्ति]; हि अतः सर्वाणि नामानि उत्तिष्ठन्ति । एतत् एषाम् साम [अस्ति]; हि एतत् सर्वैः नामभिः समम् [अस्ति] । एतत् एषाम् ब्रह्म [अस्ति]; हि एतत् सर्वाणि नामानि बिभर्ति ।
हिन्दी अर्थ
यह सब तीन रूपों में है: नाम, रूप और कर्म। नामों के लिए वाणी उनका उक्थ, अर्थात् उठने का आधार है, क्योंकि सभी नाम उसी से उठते हैं। वही उनका साम है, क्योंकि वह सभी नामों के साथ समान रूप से व्याप्त है। वही उनका ब्रह्म है, क्योंकि सभी नामों को धारण करती है।
English meaning
All this has three aspects: name, form and action. For names, speech is their uktha, the source from which they arise, since all names arise from it. It is their Saman, for it extends equally through all names. It is their brahman, for it supports all names.
व्याख्या
उक्थ, साम और ब्रह्म के अनुष्ठानिक शब्द यहाँ उठने, समान व्यापकता और धारण करने की क्रियाओं से समझाए गए हैं। नामों को अलग-अलग देखने के बजाय वाणी में उनका साझा आधार दिखाया जाता है।
Explanation
The ritual terms uktha, Saman and brahman are explained through arising, equal extension and support. Rather than treating each name separately, the passage identifies their common basis in speech.
संदर्भ
अध्याय का अंतिम ब्राह्मण नाम, रूप और कर्म के त्रिविध संक्षेप से आरम्भ होता है।
Context
The chapter’s final brahmana begins a threefold summary through name, form and action.