Passage 24.3
अस्तमित आदित्ये याज्ञवल्क्य किंज्योतिरेवायं पुरुष इति । चन्द्रमा एवास्य ज्योतिर्भवतीति । चन्द्रमसैवायं ज्योतिषास्ते पल्ययते कर्म कुरुते विपल्येतीति । एवमेवैतद्याज्ञवल्क्य ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[जनकः पप्रच्छ—] याज्ञवल्क्य, अस्तमिते आदित्ये, अयम् पुरुषः किंज्योतिः एव [अस्ति] इति । [याज्ञवल्क्यः आह—] चन्द्रमाः एव अस्य ज्योतिः भवति इति । अयम् चन्द्रमसा एव ज्योतिषा आस्ते, पल्ययते, कर्म कुरुते, विपल्येति इति । [जनकः आह—] याज्ञवल्क्य, एतद् एवम् एव [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जनक ने पूछा: सूर्य अस्त हो जाने पर इस पुरुष की ज्योति क्या है? चन्द्रमा उसकी ज्योति होता है। चन्द्रमा के प्रकाश से ही वह बैठता है, बाहर जाता है, कर्म करता है और लौटता है। जनक ने कहा: याज्ञवल्क्य, यह ठीक है।
English meaning
Janaka asked, “When the sun has set, what is the person’s light?” “The moon. By the moon’s light the person sits, goes out, acts and returns.” “That is so, Yajnavalkya.”
व्याख्या
प्रश्न हर उत्तर की शर्त जाँचता है: सूर्य न हो तो भी कुछ अनुभव सम्भव हैं। इस क्रम का लक्ष्य केवल खगोलीय प्रकाशों की सूची नहीं है।
Explanation
Each question tests the conditions of the preceding answer. Experience remains possible without sunlight; the inquiry is not just a catalogue of celestial lights.
संदर्भ
सूर्य का अभाव मानकर प्रकाश का दूसरा साधन पूछा जाता है।
Context
Removing sunlight brings a second source of illumination into view.