Passage 24.34
स वा एष एतस्मिन् स्वप्नान्ते रत्वा चरित्वा दृष्ट्वैव पुण्यं च पापं च पुनः प्रतिन्यायं प्रतियोन्याद्रवति बुद्धान्तायैव ॥ ३४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः वा एषः एतस्मिन् स्वप्नान्ते रत्वा चरित्वा पुण्यम् च पापम् च दृष्ट्वा एव, पुनः प्रतिन्यायम् प्रतियोनि बुद्धान्ताय एव आद्रवति ।
हिन्दी अर्थ
वह इस स्वप्न-अवस्था में रमकर, विचरकर और पुण्य-पाप को केवल देखकर फिर उलटे क्रम से अपने पूर्वस्थान, जाग्रत अवस्था, में लौटता है।
English meaning
Having enjoyed and ranged in the dream state, merely seeing good and evil, it returns by the reverse course to its former station, waking.
व्याख्या
पूर्व के स्वप्न-जागरण सूत्र को फिर कहकर अब जन्म-मरण के बीच गति की उपमा तैयार की जाती है। पुनरावृत्ति स्रोत का सचेत संगठन है।
Explanation
Repeating the dream-waking formula prepares an analogy for movement between life and death. The recurrence belongs to the source’s organization.
संदर्भ
आनन्द के विवेचन से देहगत यात्रा की चर्चा की ओर लौटने का संक्रमण है।
Context
This return prepares the transition from bliss to embodied departure.