Passage 18.1
अथ हैनं गार्गी वाचक्नवी पप्रच्छ याज्ञवल्क्येति होवाच । यदिदं सर्वमप्स्वोतं च प्रोतं च कस्मिन्नु खल्वाप ओताश्च प्रोताश्चेति । वायौ गार्गीति । कस्मिन्नु खलु वायुरोतश्च प्रोतश्चेति । अन्तरिक्षलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खल्वन्तरिक्षलोका ओतश्च प्रोतश्चेति । गन्धर्वलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खलु गन्धर्वलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । अदित्यलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खल्वादित्यलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । चन्द्रलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खलु चन्द्रलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । नक्षत्रलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खलु नक्षत्रलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । देवलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खलु देवलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । इन्द्रलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खल्विन्द्रलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । प्रजापतिलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खलु प्रजापतिलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । ब्रह्मलोकेषु गार्गीति । कस्मिन्नु खलु ब्रह्मलोका ओताश्च प्रोताश्चेति । स होवाच गार्गि मातिप्राक्षीः । मा ते मूर्धा व्यपप्तत् । अनतिप्रश्न्यां वै देवतामतिपृच्छसि । गार्गि मातिप्राक्षीरिति । ततो ह गार्गी वाचक्नव्युपरराम ॥ १ ॥
पदच्छेद
हिन्दी अर्थ
तब गार्गी वाचक्नवी ने पूछा: याज्ञवल्क्य, यदि यह सब जल में ताने-बाने की तरह बुना है, तो जल किसमें बुना है? वायु में, गार्गी। वायु किसमें? अन्तरिक्षलोकों में। अन्तरिक्षलोक किसमें? गन्धर्वलोकों में। गन्धर्वलोक किसमें? आदित्यलोकों में। आदित्यलोक किसमें? चन्द्रलोकों में। चन्द्रलोक किसमें? नक्षत्रलोकों में। नक्षत्रलोक किसमें? देवलोकों में। देवलोक किसमें? इन्द्रलोकों में। इन्द्रलोक किसमें? प्रजापतिलोकों में। प्रजापतिलोक किसमें? ब्रह्मलोकों में। ब्रह्मलोक किसमें बुने हैं? याज्ञवल्क्य ने कहा: गार्गी, सीमा से आगे मत पूछो, ऐसा न हो कि तुम्हारा सिर गिर पड़े। तुम उस देवता के विषय में सीमा से आगे पूछती हो जिसके बारे में इस प्रकार आगे प्रश्न नहीं करना चाहिए। गार्गी, अधिक मत पूछो। तब गार्गी वाचक्नवी चुप हो गईं।
English meaning
Then Gargi Vachaknavi asked, “Yajnavalkya, if all this is woven, warp and woof, in water, in what is water woven?” “In wind, Gargi.” “In what is wind woven?” “In the worlds of intermediate space.” “And those worlds?” “In the gandharva worlds.” “And those?” “In the solar worlds.” “And those?” “In the lunar worlds.” “And those?” “In the stellar worlds.” “And those?” “In the worlds of the gods.” “And those?” “In Indra’s worlds.” “And those?” “In Prajapati’s worlds.” “And those?” “In the brahma worlds.” “In what are the brahma worlds woven?” He said, “Gargi, do not question beyond the limit, lest your head fall off. You are questioning beyond the limit about a deity that is not to be questioned in this way. Gargi, do not press further.” Gargi Vachaknavi then fell silent.
व्याख्या
ताने-बाने का रूपक किसी वस्तु के दूसरे में आश्रित होने को दिखाता है। सिर गिरने की कठोर चेतावनी प्राचीन वाद-कथा का अंश है, स्त्रियों के प्रश्न करने पर आधुनिक निषेध नहीं; गार्गी आगे फिर निर्णायक प्रश्न करेंगी।
Explanation
The weaving image expresses dependence on a wider foundation. The severe head-falling warning belongs to the ancient debate narrative, not a modern ban on women asking questions. Gargi will return with decisive questions later.
संदर्भ
गार्गी पहली बार जगत् के क्रमशः व्यापक आधार का प्रश्न उठाती हैं।
Context
Gargi’s first intervention asks for successively wider foundations of the world.