Passage 24.17
स वा एष एतस्मिन् बुद्धान्ते रत्वा चरित्वा दृष्ट्वैव पुण्यं च पापं च पुनः प्रतिन्यायं प्रतियोन्याद्रवति स्वप्नान्तायैव ॥ १७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः वा एषः एतस्मिन् बुद्धान्ते रत्वा चरित्वा पुण्यम् च पापम् च दृष्ट्वा एव, पुनः प्रतिन्यायम् प्रतियोनि स्वप्नान्ताय एव आद्रवति ।
हिन्दी अर्थ
वह इस जाग्रत अवस्था में रमकर, विचरकर और पुण्य-पाप को केवल देखकर फिर उलटे क्रम से अपने पूर्वस्थान, स्वप्न की अवस्था, की ओर लौटता है।
English meaning
Having enjoyed and ranged in the waking state, merely seeing good and evil, it returns by the reverse course to its former station, the dream state.
व्याख्या
अवस्था बदलती है, पर जिस पुरुष की चर्चा है उसकी निरन्तरता मानी जाती है। यही अगले मछली-रूपक का आधार बनेगा।
Explanation
States change while the person under discussion is treated as continuous. This prepares the fish analogy that follows.
संदर्भ
जागरण से स्वप्न की वापसी चक्र को पूरा करती है।
Context
The movement from waking back to dream completes the cycle.