Passage 24.38
तद्यथा राजानं प्रयियासन्तमुग्राः प्रत्येनसः सूतग्रामण्योऽभिसमायन्ति । एवमेवेममात्मानमन्तकाले सर्वे प्राणा अभिसमायन्ति । यत्रैतदूर्ध्वोच्छ्वासी भवति ॥ ३८ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् यथा प्रयियासन्तम् राजानम् उग्राः प्रत्येनसः सूतग्रामण्यः अभिसमायन्ति, एवम् एव अन्तकाले इमम् आत्मानम् सर्वे प्राणाः अभिसमायन्ति—यत्र एतत् [अयम्] ऊर्ध्वोच्छ्वासी भवति ।
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रस्थान करना चाहने वाले राजा के पास उग्र अधिकारी, प्रहरी, सूत और ग्रामणी एकत्र होते हैं, वैसे ही अन्तकाल में इस आत्मा के पास सभी प्राण एकत्र होते हैं, जब उसकी श्वास ऊपर को खिंचती है।
English meaning
As officers, guards, charioteers and village chiefs gather around a king preparing to depart, so all the vital powers gather around this self at the end, when its breathing rises upward.
व्याख्या
सभी प्राणों का एकत्र होना अगले ब्राह्मण के इन्द्रिय-संकोच का पूर्वसंकेत है। यह धार्मिक कथन है, मृत्यु के समय किए जाने वाले किसी शारीरिक हस्तक्षेप का निर्देश नहीं।
Explanation
The gathering of vital powers anticipates the withdrawal of faculties in the next brahmana. It is a religious account, not an instruction for bodily intervention at the end of life.
संदर्भ
स्वागत के बाद प्रस्थान की राजकीय उपमा से ब्राह्मण समाप्त होता है।
Context
After reception, the royal departure image closes the brahmana.