Passage 11.1
इयं पृथिवी सर्वेषां भूतानां मधु । अस्यै पृथिव्यै सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्यां पृथिव्यां तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यस्चायमध्यात्मं शारीरस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
इयम् पृथिवी सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्यै पृथिव्यै सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्याम् पृथिव्याम् यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् शारीरः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह पृथिवी सभी प्राणियों का मधु है और इस पृथिवी के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस पृथिवी में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर शरीर में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This earth is honey for all beings, and all beings are honey for this earth. The radiant, immortal person in this earth and the radiant, immortal person within the individual in the body are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
पृथिवी केवल प्राणियों की वस्तु नहीं; प्राणी भी उसका मधु कहे गए हैं। बाह्य पृथिवी और व्यक्तिगत शरीर के तेजोमय पुरुष को एक आत्मा में जोड़ा गया है। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Earth is not merely an object for beings: beings in turn are its honey. The radiant person of the earth and that of the individual body are brought together in one Self. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
मधु-विद्या की शुरुआत पृथिवी और प्राणियों की पारस्परिकता से होती है।
Context
The honey teaching begins with reciprocity between earth and beings.