Passage 46.17
अथ य इच्छेद् दुहिता मे पण्डिता जायेत सर्वमायुरियादिति तिलौदनं पाचयित्वा सर्पिष्मन्तमश्नीयाताम् । ईश्वरौ जनयितवै ॥ १७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यः दुहिता मे पण्डिता जायेत; सर्वम् आयुः इयात् इति इच्छेत्, तिलौदनम् पाचयित्वा [तौ] सर्पिष्मन्तम् अश्नीयाताम् । [तौ] जनयितवै ईश्वरौ [स्तः] ।
हिन्दी अर्थ
फिर जो चाहे, “मेरी पुत्री विदुषी पैदा हो और पूरी आयु जिए,” उसके लिए प्राचीन पाठ दोनों को तिल के साथ पके चावल बनवाकर घी सहित खाने को कहता है। पाठ दावा करता है कि वे ऐसी पुत्री उत्पन्न करने में समर्थ होंगे।
English meaning
For one who wishes, “May my daughter be born learned and live a full lifespan,” the ancient text tells the couple to have rice prepared with sesame and eat it with ghee. It claims that they will be able to produce such a daughter.
व्याख्या
पण्डिता का सामान्य अर्थ विदुषी है; मूल वाक्य उसकी विद्या को केवल गृहकार्य तक सीमित नहीं करता। भोजन-विधान को विद्वत्ता या जन्म-लिंग निर्धारित करने का चिकित्सकीय उपाय नहीं माना गया है।
Explanation
Pandita ordinarily means learned; this base sentence does not restrict her learning to household work. The food rite is not treated as a medical means of determining intelligence or sex at birth.
संदर्भ
पुत्रों की कामनाओं के बीच यहाँ पुत्री की विद्वत्ता की कामना स्पष्ट रूप से दी गई है।
Context
Amid formulas for sons, this passage explicitly expresses a wish for a learned daughter.