Passage 46.16
अथ य इच्छेत् पुत्रो मे श्यामो लोहिताक्षो जायेत त्रीन् वेदाननुब्रुवीत सर्वमायुरियादिति उदौदनं पाचयित्वा सर्पिष्मन्तमश्नीयाताम् । ईश्वरौ जनयितवै ॥ १६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यः पुत्रः मे श्यामः लोहिताक्षः जायेत; त्रीन् वेदान् अनुब्रुवीत; सर्वम् आयुः इयात् इति इच्छेत्, उदौदनम् पाचयित्वा [तौ] सर्पिष्मन्तम् अश्नीयाताम् । [तौ] जनयितवै ईश्वरौ [स्तः] ।
हिन्दी अर्थ
फिर जो चाहे, “मेरा पुत्र श्याम वर्ण और लाल आँखों वाला पैदा हो, तीन वेदों का पाठ करे और पूरी आयु जिए,” उसके लिए प्राचीन पाठ दोनों को जल में पके चावल बनवाकर घी सहित खाने को कहता है। पाठ दावा करता है कि वे ऐसा पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ होंगे।
English meaning
For one who wishes, “May my son be born dark in complexion and red-eyed, recite three Vedas and live a full lifespan,” the ancient text tells the couple to have rice cooked in water and eat it with ghee. It claims that they will be able to produce such a son.
व्याख्या
लोहिताक्ष सीधे लाल आँखों को कहता है; उदौदन केवल जल में पकाया अन्न है। यह पाठ की कामना-रचना है, किसी रूपरंग को श्रेष्ठ मानने या भोजन से आनुवंशिक गुण बदलने की सलाह नहीं।
Explanation
Lohitaksha explicitly means red-eyed, while udaudana is rice cooked in water. This is the text’s wish-formula, not a ranking of appearances or advice for changing inherited traits through food.
संदर्भ
तीसरी भोजन-कामना तीन वेदों और स्पष्ट नेत्र-वर्ण विशेषण के साथ आती है।
Context
The third formula names three Vedas and an explicit eye-color adjective.