Passage 3.7
अथ हेममासन्यं प्राणमूचुस्त्वं न उद्गायेति । तथेति तेभ्य एष प्राण उदगायत् । तेऽविदुरनेन वै न उद्गात्रात्येष्यन्तीति । तमभिद्रुत्य पाप्मनाविव्यत्सन् । स यथाश्मानमृत्वा लोष्टो विध्वंसेतैवं हैव विध्वंसमाना विष्वञ्चो विनेशुः । ततो देवा अभवन्, परासुरा । भवत्यात्मना, परास्य द्विषन् भ्रातृव्यो भवति य एवं वेद ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ ह इमम् आसन्यम् प्राणम् ऊचुः-त्वम् नः उद्गाय इति । तथा इति तेभ्यः एषः प्राणः उदगायत् । ते [असुराः] अविदुः-अनेन वै उद्गात्रा [देवाः] नः अत्येष्यन्ति इति । तम् अभिद्रुत्य पाप्मना अविव्यत्सन् । यथा अश्मानम् ऋत्वा लोष्टः विध्वंसेत, एवम् ह एव विध्वंसमानाः विष्वञ्चः विनेशुः । ततः देवाः अभवन्; असुराः परा [अभवन्] । यः एवम् वेद, [सः] आत्मना भवति; अस्य द्विषन् भ्रातृव्यः परा भवति ।
हिन्दी अर्थ
तब उन्होंने मुख में स्थित इस प्राण से कहा: तुम हमारे लिए उद्गीथ गाओ। उसने स्वीकार करके उनके लिए गाया। असुरों ने जान लिया कि इस उद्गाता से ये हमसे आगे निकलेंगे। उन्होंने उस पर धावा बोलकर उसे पाप्मा से बेधना चाहा। जैसे पत्थर से टकराया मिट्टी का ढेला टूट जाता है, वैसे ही वे टूटकर सभी दिशाओं में नष्ट हो गए। तब देवता सफल हुए और असुर पराजित। जो ऐसा जानता है, वह स्वयं समर्थ होता है और उससे द्वेष करने वाला प्रतिद्वन्द्वी पराजित होता है।
English meaning
They then asked this vital power situated in the mouth, “Sing the udgitha for us.” It agreed and sang for them. The Asuras realized that this chanter would enable the gods to surpass them. They rushed at it and tried to pierce it with evil. Like a clod of earth shattering against a stone, they broke apart and perished in every direction. The gods prevailed and the Asuras were defeated. One who knows this prospers personally, while the hostile rival is overcome.
व्याख्या
ढेले और पत्थर की उपमा असुरों के प्रहार को उलट देती है: प्राण को दूषित करने का प्रयत्न स्वयं आक्रमणकारी को तोड़ता है। भ्रातृव्य प्रतिद्वन्द्वी है, केवल सगा भाई नहीं। अन्त की शत्रु-पराजय ज्ञान की प्राचीन फलश्रुति है, किसी व्यक्ति को हानि पहुँचाने की सलाह नहीं।
Explanation
The clod-and-stone image reverses the attack: the attempt to corrupt breath destroys the attackers. Bhratrivya means a rival, not necessarily a literal brother. The final defeat of an enemy is an ancient statement of the knowledge’s reward, not advice to harm a person.
संदर्भ
पाँच असफल परीक्षणों के बाद आसन्य प्राण कथा का सफल उद्गाता बनता है।
Context
After five failed trials, the vital power in the mouth becomes the successful chanter.