Passage 3.26
तस्य हैतस्य साम्नो यः सुवर्णं वेद भवति हास्य सुवर्णम् । तस्य वै स्वर एव सुवर्णम् । भवति हास्य सुवर्णं य एवमेतत्साम्नः सुवर्णं वेद ॥ २६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तस्य ह एतस्य साम्नः यः सुवर्णम् वेद, अस्य सुवर्णम् ह भवति । तस्य स्वरः एव सुवर्णम् वै [अस्ति] । यः एवम् एतत् साम्नः सुवर्णम् वेद, अस्य सुवर्णम् ह भवति ।
हिन्दी अर्थ
जो इस साम का सुवर्ण जानता है, उसके पास सुवर्ण होता है। उसका स्वर ही उसका सुवर्ण है। जो इस साम के सुवर्ण को इस प्रकार जानता है, उसके पास सुवर्ण होता है।
English meaning
Whoever knows the gold of this Saman obtains gold. Its tone is its gold. One who knows Saman’s gold in this way obtains gold.
व्याख्या
स्वर्ण गान के उत्कृष्ट और मूल्यवान गुण का रूपक बनता है। पाठ वास्तविक स्वर्ण प्राप्ति को भी फल की भाषा में कहता है, इसलिए उसे अनुवाद से हटाया नहीं गया; फिर भी यह आधुनिक आर्थिक आश्वासन नहीं है।
Explanation
Gold becomes an image for the excellence and value of the chant. The passage also speaks of obtaining gold as a reward, so that claim is retained in translation, without presenting it as a modern financial assurance.
संदर्भ
स्व-स्वर के बाद सुवर्ण-स्वर का समानान्तर खेल आता है।
Context
The play on sva and svara is followed by a parallel association of suvarna and svara.