Passage 3.25
तस्य हैतस्य साम्नो यः स्वं वेद भवति हास्य स्वम् । तस्य वै स्वर एव स्वम् । तस्मादार्त्विज्यं करिष्यन् वाचि स्वरमिच्छेत । तया वाचा स्वरसम्पन्नयार्त्विज्यं कुर्यात् । तस्माद्यज्ञे स्वरवन्तं दिदृक्षन्त एव । अथो यस्य स्वं भवति । भवति हास्य स्वं य एवमेतत्साम्नः स्वं वेद ॥ २५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तस्य ह एतस्य साम्नः यः स्वम् वेद, अस्य स्वम् ह भवति । तस्य स्वरः एव स्वम् वै [अस्ति] । तस्मात् आर्त्विज्यम् करिष्यन् वाचि स्वरम् इच्छेत । तया स्वरसम्पन्नया वाचा आर्त्विज्यम् कुर्यात् । तस्मात् यज्ञे स्वरवन्तम् दिदृक्षन्ते एव, अथ उ यस्य स्वम् भवति [तम्] । यः एवम् एतत् साम्नः स्वम् वेद, अस्य स्वम् ह भवति ।
हिन्दी अर्थ
जो इस साम के स्व, अर्थात् अपने धन या सम्पत्ति, को जानता है, उसके पास स्व होता है। उसका स्वर ही उसका स्व है। इसलिए ऋत्विज् का कार्य करने वाला वाणी में स्वर साधे और स्वरसम्पन्न वाणी से अनुष्ठानिक पुरोहित का कार्य करे। इसीलिए यज्ञ में अच्छे स्वर वाले को देखना चाहते हैं, और उसे भी जिसके पास सम्पदा है। जो साम के इस स्व को इस प्रकार जानता है, उसके पास स्व होता है।
English meaning
Whoever knows the “own wealth” of this Saman obtains wealth. Its tone is its own wealth. A person about to serve as an officiating priest should therefore seek tone in the voice and perform the priestly role with a voice possessing it. Hence at a sacrifice people want to see someone with a good voice, and someone who possesses resources. One who knows this wealth of Saman obtains wealth.
व्याख्या
यहाँ स्वर में गान का सुरीला उच्चारण और ध्वनि का गुण निहित है। आर्त्विज्यम् अनुष्ठान में ऋत्विज् का कार्य है। सम्पदा का फल एक पारम्परिक प्रशंसा-वाक्य है; अनुवाद इसे गायन से धन मिलने की सुनिश्चित योजना नहीं बनाता।
Explanation
Svara includes the quality and tuneful production of the voice. Artvijya is the function of an officiant in a ritual. Wealth is a traditional promised benefit, not a guaranteed plan for earning money through singing.
संदर्भ
स्वर के महत्व को स्व और स्वर की शब्द-समानता से जोड़ा जाता है।
Context
The importance of vocal tone is linked to the resemblance between sva, one’s possessions, and svara, tone.