Passage 21.27
अथ होवाच ब्राह्मणा भगवन्तो यो वः कामयते स मा पृच्छतु । सर्वे वा मा पृच्छत । यो वः कामयते तं वः पृच्छामि सर्वान् वा वः पृच्छामीति । ते ह ब्राह्मणा न दधृषुः ॥ २७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ ह [याज्ञवल्क्यः] उवाच—ब्राह्मणाः भगवन्तः, यः वः कामयते, सः मा पृच्छतु । वा सर्वे मा पृच्छत । यः वः कामयते, वः तम् [अहम्] पृच्छामि; वा वः सर्वान् [अहम्] पृच्छामि इति । ते ह ब्राह्मणाः न दधृषुः ।
हिन्दी अर्थ
तब याज्ञवल्क्य ने कहा: आदरणीय ब्राह्मणो, आपमें जो चाहे मुझसे प्रश्न करे, या आप सब मिलकर पूछें। आपमें जो चाहे, उससे मैं प्रश्न करूँ, या आप सब से पूछूँ। ब्राह्मणों ने साहस नहीं किया।
English meaning
Yajnavalkya then said, “Revered Brahmins, whichever of you wishes may question me, or all of you may do so. I may question whichever of you wishes, or I may question you all.” The Brahmins did not dare.
व्याख्या
अकेले या सामूहिक प्रश्न, तथा प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता की अदला-बदली, दोनों विकल्प दिए जाते हैं। मौन के बाद याज्ञवल्क्य स्वयं अंतिम काव्यात्मक प्रश्न उठाएँगे।
Explanation
Both individual and collective questioning are offered, with the roles reversible. After their silence, Yajnavalkya will pose the concluding verse-question.
संदर्भ
सभा के सामने अब खुली प्रश्नोत्तर-चुनौती रखी जाती है।
Context
An open challenge is now addressed to the whole assembly.