Passage 21.12
रूपाण्येव यस्यायतनं चक्षुर्लोको मनो ज्योतिर्यो वै तं पुरुषं विद्यात्सर्वस्यात्मनः परायणं स वै वेदिता स्यात् । याज्ञवल्क्य वेद वा अहं तं पुरुषं सर्वस्यात्मनः परायणं यमात्थ । य एवासावादित्ये पुरुषः स एषः । वदैव शाकल्य तस्य का देवतेति । सत्यमिति होवाच ॥ १२ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[शाकल्यः आह—] याज्ञवल्क्य, यस्य रूपाणि एव आयतनम्, [यस्य] चक्षुः लोकः, [यस्य] मनः ज्योतिः, सर्वस्य आत्मनः परायणम् तम् पुरुषम् यः वै विद्यात्, सः वै वेदिता स्यात् । [याज्ञवल्क्यः आह—] यम् आत्थ, सर्वस्य आत्मनः परायणम् तम् पुरुषम् अहम् वा वेद । यः एव असौ आदित्ये पुरुषः, सः एषः [अस्ति] । शाकल्य, वद एव । [शाकल्यः पप्रच्छ—] तस्य का देवता इति । [याज्ञवल्क्यः] ह उवाच—सत्यम् इति ।
हिन्दी अर्थ
शाकल्य ने कहा: जिसका आश्रय रूप, जिसका लोक आँख और जिसकी ज्योति मन है, उस सम्पूर्ण व्यक्ति के परम आश्रय पुरुष को जो जाने, वही ज्ञाता हो, याज्ञवल्क्य। याज्ञवल्क्य ने कहा: तुम जिस सम्पूर्ण व्यक्ति के परम आश्रय पुरुष को कहते हो, उसे मैं जानता हूँ; वह यही सूर्य में स्थित पुरुष है। शाकल्य, बताओ, उसकी देवता कौन है? शाकल्य ने कहा: सत्य।
English meaning
Shakalya said, “One who knows the person whose abode is visible forms, whose world is the eye and whose light is mind, the final resort of the whole self, would indeed be a knower, Yajnavalkya.” Yajnavalkya replied, “I know that person, the final resort of the whole self, whom you describe: it is the person in the sun. Tell me, Shakalya, what is its deity?” He answered, “Truth.”
व्याख्या
दृश्य रूप, आँख और सूर्य को एक संगति में रखा गया है। मन ज्योति है क्योंकि दृश्य का अर्थ मन के प्रकाश में ग्रहण होता है।
Explanation
Visible form, eye and sun are correlated. Mind is called light because it is through mental awareness that the visible is apprehended.
संदर्भ
आठ पुरुषों की परीक्षा में सूर्य में स्थित पुरुष का प्रश्न है।
Context
The eight-person examination now concerns the person in the sun.