Passage 21.16
आप एव यस्यायतनं हृदयं लोको मनो ज्योतिर्यो वै तं पुरुषं विद्यात्सर्वस्यात्मनः परायणं स वै वेदिता स्यात् । याज्ञवल्क्य वेद वा अहं तं पुरुषं सर्वस्यात्मनः परायणं यमात्थ । य एवायं अप्सु पुरुषः स एषः । वदैव शाकल्य तस्य का देवतेति । वरुण इति होवाच ॥ १६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[शाकल्यः आह—] याज्ञवल्क्य, यस्य आपः एव आयतनम्, [यस्य] हृदयम् लोकः, [यस्य] मनः ज्योतिः, सर्वस्य आत्मनः परायणम् तम् पुरुषम् यः वै विद्यात्, सः वै वेदिता स्यात् । [याज्ञवल्क्यः आह—] यम् आत्थ, सर्वस्य आत्मनः परायणम् तम् पुरुषम् अहम् वा वेद । यः एव अयम् अप्सु पुरुषः, सः एषः [अस्ति] । शाकल्य, वद एव । [शाकल्यः पप्रच्छ—] तस्य का देवता इति । [याज्ञवल्क्यः] ह उवाच—वरुणः इति ।
हिन्दी अर्थ
शाकल्य ने कहा: जिसका आश्रय जल, जिसका लोक हृदय और जिसकी ज्योति मन है, उस सम्पूर्ण व्यक्ति के परम आश्रय पुरुष को जो जाने, वही ज्ञाता हो, याज्ञवल्क्य। याज्ञवल्क्य ने कहा: तुम जिस सम्पूर्ण व्यक्ति के परम आश्रय पुरुष को कहते हो, उसे मैं जानता हूँ; वह यही जल में दिखने वाला पुरुष है। शाकल्य, बताओ, उसकी देवता कौन है? शाकल्य ने कहा: वरुण।
English meaning
Shakalya said, “One who knows the person whose abode is the waters, whose world is the heart and whose light is mind, the final resort of the whole self, would indeed be a knower, Yajnavalkya.” Yajnavalkya replied, “I know that person, the final resort of the whole self, whom you describe: it is the person in the waters. Tell me, Shakalya, what is its deity?” He answered, “Varuna.”
व्याख्या
जल के पुरुष का वरुण से सम्बन्ध वैदिक देवता-संगति है। हृदय और मन के द्वारा जलरूप की अनुभूति का आन्तरिक पक्ष भी बना रहता है।
Explanation
Varuna is the Vedic divine correlate of the person in water. Heart and mind retain the inner aspect of apprehending that form.
संदर्भ
आठ पुरुषों की परीक्षा में जल में दिखने वाला पुरुष का प्रश्न है।
Context
The eight-person examination now concerns the person in the waters.