Passage 21.14
तम एव यस्यायतनं हृदयं लोको मनो ज्योतिर्यो वै तं पुरुषं विद्यात्सर्वस्यात्मनः परायणं स वै वेदिता स्यात् । याज्ञवल्क्य वेद वा अहं तं पुरुषं सर्वस्यात्मनः परायणं यमात्थ । य एवायं छायामयः पुरुषः स एषः । वदैव शाकल्य तस्य का देवतेति । मृत्युरिति होवाच ॥ १४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[शाकल्यः आह—] याज्ञवल्क्य, यस्य तमः एव आयतनम्, [यस्य] हृदयम् लोकः, [यस्य] मनः ज्योतिः, सर्वस्य आत्मनः परायणम् तम् पुरुषम् यः वै विद्यात्, सः वै वेदिता स्यात् । [याज्ञवल्क्यः आह—] यम् आत्थ, सर्वस्य आत्मनः परायणम् तम् पुरुषम् अहम् वा वेद । यः एव अयम् छायामयः पुरुषः, सः एषः [अस्ति] । शाकल्य, वद एव । [शाकल्यः पप्रच्छ—] तस्य का देवता इति । [याज्ञवल्क्यः] ह उवाच—मृत्युः इति ।
हिन्दी अर्थ
शाकल्य ने कहा: जिसका आश्रय अन्धकार, जिसका लोक हृदय और जिसकी ज्योति मन है, उस सम्पूर्ण व्यक्ति के परम आश्रय पुरुष को जो जाने, वही ज्ञाता हो, याज्ञवल्क्य। याज्ञवल्क्य ने कहा: तुम जिस सम्पूर्ण व्यक्ति के परम आश्रय पुरुष को कहते हो, उसे मैं जानता हूँ; वह यही छायामय पुरुष है। शाकल्य, बताओ, उसकी देवता कौन है? शाकल्य ने कहा: मृत्यु।
English meaning
Shakalya said, “One who knows the person whose abode is darkness, whose world is the heart and whose light is mind, the final resort of the whole self, would indeed be a knower, Yajnavalkya.” Yajnavalkya replied, “I know that person, the final resort of the whole self, whom you describe: it is the shadow-formed person. Tell me, Shakalya, what is its deity?” He answered, “Death.”
व्याख्या
छाया और अन्धकार का मृत्यु से सम्बन्ध प्रतीकात्मक धार्मिक संगति है, छाया देखने से मृत्यु होने की भविष्यवाणी नहीं।
Explanation
The link of shadow and darkness with death is a religious correlation, not a prediction that seeing a shadow causes death.
संदर्भ
आठ पुरुषों की परीक्षा में छायामय पुरुष का प्रश्न है।
Context
The eight-person examination now concerns the shadow-formed person.