Passage 25.5
स वा अयमात्मा ब्रह्म विज्ञानमयो मनोमयो प्राणमयश्चक्षुर्मयः श्रोत्रमयः पृथिवीमय आपोमयो वायुमय आकाशमयस्तेजोमयोऽतेजोमयः काममयोऽकाममयः क्रोधमयोऽक्रोधमयो धर्ममयोऽधर्ममयः सर्वमयः । तद्यदेतदिदंमयोऽदोमय इति । यथाकारी यथाचारी तथा भवति । साधुकारी साधुर्भवति । पापकारी पापो भवति । पुण्यः पुण्येन कर्मणा पापः पापेन । अथो खल्वाहुः । काममय एवायं पुरुष इति । स यथाकामो भवति तत्क्रतुर्भवति । यत्क्रतुर्भवति तत्कर्म कुरुते । यत्कर्म कुरुते तदभिसंपद्यते ॥ ५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः वै अयम् आत्मा ब्रह्म [अस्ति]; विज्ञानमयः मनोमयः प्राणमयः चक्षुर्मयः श्रोत्रमयः पृथिवीमयः आपोमयः वायुमयः आकाशमयः तेजोमयः अतेजोमयः काममयः अकाममयः क्रोधमयः अक्रोधमयः धर्ममयः अधर्ममयः सर्वमयः [अस्ति] । तत् एतत् [अस्य सिद्धम्], यत् [अयम्] इदंमयः अदोमयः इति [गृह्यमाणकार्येण निर्दिश्यते] । [सः] यथाकारी यथाचारी तथा भवति; साधुकारी साधुः भवति; पापकारी पापः भवति; पुण्येन कर्मणा पुण्यः [भवति], पापेन [कर्मणा] पापः [भवति] । अथो खलु, अयम् पुरुषः काममयः एव [अस्ति] इति आहुः । सः यथाकामः भवति, तत्क्रतुः भवति; यत्क्रतुः भवति, तत् कर्म कुरुते; यत् कर्म कुरुते, तत् अभिसम्पद्यते ।
हिन्दी अर्थ
यह आत्मा ब्रह्म है: विज्ञानमय, मनोमय, प्राणमय, नेत्रमय, श्रोत्रमय, पृथ्वीमय, जलमय, वायुमय, आकाशमय, तेजोमय और अतेजोमय, काममय और अकाममय, क्रोधमय और अक्रोधमय, धर्ममय और अधर्ममय, सर्वमय। इसी को यहमय और वहमय कहते हैं। जैसा उसका कर्म और आचरण, वैसा वह होता है। अच्छा करने वाला अच्छा होता है; पाप करने वाला पापी। पुण्य कर्म से पुण्यवान और पाप कर्म से पापी होता है। फिर यह भी कहते हैं: यह पुरुष वास्तव में काममय है। जैसी उसकी इच्छा होती है, वैसा उसका संकल्प होता है; जैसा संकल्प होता है, वैसा कर्म करता है; और जैसा कर्म करता है, वैसी प्राप्ति होती है।
English meaning
This self is brahman: constituted by discernment, mind, vital breath, sight, hearing, earth, water, wind, space, light and absence of light, desire and absence of desire, anger and absence of anger, right and wrong, and everything. This is what is meant by “constituted by this” and “constituted by that.” As it acts and conducts itself, so it becomes. One who does good becomes good; one who does evil becomes evil, becoming meritorious through meritorious action and evil through evil action. They also say: this person is indeed constituted by desire. As the desire, so the resolve; as the resolve, so the action performed; and as the action performed, so the result attained.
व्याख्या
मय-प्रत्यय यहाँ सम्बन्ध और रूपग्रहण भी व्यक्त करता है; आत्मा को इन सभी पदार्थों का भौतिक मिश्रण कहना आवश्यक नहीं। नैतिक कर्म का महत्त्व स्वीकारते हुए भी इससे किसी पीड़ित व्यक्ति के दुख का दोष उस पर नहीं ठहराना चाहिए।
Explanation
The suffix maya can express association and taking on a character, not necessarily a physical mixture of all these substances. The passage stresses ethical action, but it should not be used to blame a suffering person for their condition.
संदर्भ
देहान्तरण के पीछे इच्छा, संकल्प और कर्म का क्रम दिया जाता है।
Context
Desire, resolve and action explain the pattern behind re-embodiment.