Passage 25.4
तद्यथा पेशस्कारी पेशसो मात्रामपादायान्यन्नवतरं कल्याणतरं रूपं तनुते । एवमेवायमात्मेदं शरीरं निहत्याविद्यां गमयित्वान्यन्नवतरं कल्याणतरं रूपं कुरुते । पित्र्यं वा गान्धर्वं वा दैवं वा प्राजापत्यं वा ब्राह्मं वान्येषां वा भूतानाम् ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् यथा पेशस्कारी पेशसः मात्राम् अपादाय अन्यत् नवतरम् कल्याणतरम् रूपम् तनुते, एवम् एव अयम् आत्मा इदम् शरीरम् निहत्य, [शरीरम्] अविद्याम् गमयित्वा, अन्यत् नवतरम् कल्याणतरम् रूपम् कुरुते—पित्र्यम् वा गान्धर्वम् वा दैवम् वा प्राजापत्यम् वा ब्राह्मम् वा अन्येषाम् वा भूतानाम् [रूपम्] ।
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वर्णकारी सोने का एक अंश लेकर उससे दूसरा, अधिक नया और अधिक सुन्दर रूप बनाता है, वैसे ही यह आत्मा इस शरीर को छोड़कर उसे अचेतन बनाता और दूसरा, अधिक नया और अधिक सुन्दर रूप रचता है: पितरों का, गन्धर्वों का, देवताओं का, प्रजापति का, ब्रह्मा का अथवा अन्य प्राणियों का रूप।
English meaning
As a gold-worker takes a portion of gold and fashions another, newer and finer form, so this self leaves this body, renders it insensible and fashions another, newer and finer form: one belonging to the ancestors, the Gandharvas, the gods, Prajapati, Brahma or other beings.
व्याख्या
पेशस्कारी को परम्परागत व्याख्या के अनुसार स्वर्णकारी लिया गया है। छह सम्भावनाएँ धार्मिक लोककल्पना का भाग हैं; आगे कर्म और इच्छा इस प्रक्रिया का सम्बन्ध स्पष्ट करेंगे।
Explanation
Peshaskari is understood as a gold-worker following traditional explanation. The six possibilities belong to the text’s religious cosmology; action and desire will next explain the connection.
संदर्भ
एक सामग्री से नया आभूषण बनने की उपमा पुनः देहधारण समझाती है।
Context
Fashioning a new ornament from material illustrates re-embodiment.