Passage 25.14
इहैव सन्तोऽथ विद्मस्तद्वयं न चेदवेदिर्महती विनष्टिः । ये तद्विदुरमृतास्ते भवन्त्यथेतरे दुःखमेवापियन्ति ॥ १४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ वयम् इह एव सन्तः तत् विद्मः । [तत्] न चेत् [विदितवन्तः वयम्, ततः अहम्] अवेदिः [स्याम्]; [अवेदिः चेत् स्याम्,] महती विनष्टिः [स्यात्] । ये तत् विदुः, ते अमृताः भवन्ति; अथ इतरे दुःखम् एव अपियन्ति ।
हिन्दी अर्थ
हम यहीं रहते हुए उसे जान लें। यदि यहाँ नहीं जाना तो बड़ी हानि है। जो उसे जानते हैं वे अमृत होते हैं; अन्य लोग दुख की ओर ही जाते हैं।
English meaning
While still here, let us come to know it. If it is not known, the loss is great. Those who know it become immortal; the others go into suffering.
व्याख्या
इहैव, यहीं, बार-बार लौटने वाला सूत्र है। अमृत और दुख धार्मिक मुक्ति-विवेचन के पद हैं, ज्ञान की परीक्षा में सफलता या असफलता का सामाजिक मूल्यांकन नहीं।
Explanation
“Here itself” is a recurring emphasis. Immortality and suffering belong to the religious discussion of release, not a social ranking based on passing a knowledge test.
संदर्भ
बोध की आवश्यकता को इसी जीवन की तात्कालिकता से जोड़ा जाता है।
Context
The urgency of understanding is located in this life.