Passage 7.2
स होवाच गार्ग्यः य एवासावादित्ये पुरुष एतमेवाहं ब्रह्मोपास इति । स होवाचाजातशत्रुर् मा मैतस्मिन्संवदिष्ठाः । अतिष्ठाः सर्वेषां भूतानां मूर्धा राजेति वा अहमेतमुपास इति । स य एतमेवमुपास्तेऽतिष्ठाः सर्वेषां भूतानां मूर्धा राजा भवति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह गार्ग्यः उवाच-यः एव असौ आदित्ये पुरुषः [अस्ति], एतम् एव अहम् ब्रह्म उपासे इति । सः ह अजातशत्रुः उवाच-मा मा एतस्मिन् संवदिष्ठाः । अतिष्ठाः सर्वेषाम् भूतानाम् मूर्धा राजा इति वा अहम् एतम् उपासे इति । सः यः एतम् एवम् उपास्ते, [सः] अतिष्ठाः सर्वेषाम् भूतानाम् मूर्धा राजा भवति ।
हिन्दी अर्थ
गार्ग्य ने कहा: मैं सूर्य में स्थित उस पुरुष की ही ब्रह्म के रूप में उपासना करता हूँ। अजातशत्रु ने कहा: इस विषय में मुझसे बात मत बढ़ाइए; मैं इसकी उपासना सबसे ऊपर स्थित, सभी प्राणियों का मस्तक और राजा के रूप में करता हूँ। जो इसकी इस प्रकार उपासना करता है, वह सबसे ऊपर स्थित, सब प्राणियों का मस्तक और राजा होता है।
English meaning
Gargya said, “I meditate on that person in the sun as Brahman.” Ajatashatru replied, “Do not pursue this account with me; I meditate on it as the one who stands above all, the head and king of all beings.” Whoever meditates on it in this way receives this result: That person stands above all, becoming the head and king of all beings.
व्याख्या
राजा इस ध्यान को नकारते नहीं, बल्कि उससे परिचित होने और उसका सीमित फल जानने की बात करते हैं। सूर्य की ऊँचाई और प्रधानता से नेतृत्व का सम्बन्ध रखा गया है।
Explanation
The king does not simply reject this meditation; he already knows it and its particular result. The sun’s elevation and prominence are associated with leadership.
संदर्भ
सूर्य के पुरुष को पहला ध्यानविषय बनाया जाता है।
Context
The person in the sun is the first proposed object of meditation.