Passage 7.14
स होवाचाजातशत्रुः एतावन्नू३ इति । एतावद्धीति । नैतावता विदितं भवतीति । स होवाच गार्ग्यः उप त्वायानीति ॥ १४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह अजातशत्रुः उवाच-एतावत् नू३ इति । एतावत् हि इति [गार्ग्यः उवाच] । एतावता विदितम् न भवति इति [अजातशत्रुः उवाच] । सः ह गार्ग्यः उवाच-[अहम्] त्वा उप आयानि इति ।
हिन्दी अर्थ
अजातशत्रु ने कहा: क्या इतना ही है? गार्ग्य ने कहा: हाँ, इतना ही। राजा ने कहा: इतने से वह जाना नहीं जाता। गार्ग्य ने कहा: मैं आपके पास शिष्य होकर आऊँ।
English meaning
Ajatashatru asked, “Is that all?” Gargya answered, “That is all.” The king said, “It is not known through this much.” Gargya replied, “Let me approach you as a pupil.”
व्याख्या
राजा अनेक उपासनाओं को पूर्ण ज्ञान के समान मानने से इनकार करते हैं। गार्ग्य का “पास आना” यहाँ शिक्षा ग्रहण करने का निवेदन है, केवल शारीरिक निकटता नहीं।
Explanation
The king refuses to equate a collection of particular meditations with complete knowledge. Gargya’s request to approach is a request for instruction, not merely to stand nearby.
संदर्भ
बालाकि की बारह उपासनाओं के बाद संवाद में शिक्षक और विद्यार्थी की स्थिति बदलती है।
Context
After Balaki’s twelve contemplations, the roles of teacher and pupil are reversed.