Passage 7.19
अथ यदा सुषुप्तो भवति । यदा न कस्य चन वेद । हिता नाम नाड्यो द्वासप्ततिः सहस्राणि हृदयात्पुरीततमभिप्रतिष्ठन्ते । ताभिः प्रत्यवसृप्य पुरीतति शेते । स यथा कुमारो वा महाराजो वा महाब्राह्मणो वाऽतिघ्नीमानन्दस्य गत्वा शयीत । एवमेवैष एतच्छेते ॥ १९ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यदा [एषः] सुषुप्तः भवति, यदा कस्य चन [विषयस्य सम्बन्धि किञ्चन] न वेद, हिता नाम नाड्यः द्वासप्ततिः सहस्राणि हृदयात् पुरीततम् अभिप्रतिष्ठन्ते; ताभिः प्रत्यवसृप्य पुरीतति शेते । सः यथा कुमारः वा महाराजः वा महाब्राह्मणः वा आनन्दस्य अतिघ्नीम् [अवस्थाम्] गत्वा शयीत, एवम् एव एषः एतत् शेते ।
हिन्दी अर्थ
फिर जब वह गहरी नींद में होता है, जब कुछ भी नहीं जानता, तब हिता नामक बहत्तर हजार नाड़ियाँ, जो हृदय से पुरीतत् तक फैली हैं, उनका वर्णन आता है। उन नाड़ियों से पीछे लौटकर वह पुरीतत् में सोता है। जैसे कोई बालक, महाराजा या महान् ब्राह्मण आनन्द की चरम सीमा पर पहुँचकर सोए, वैसे ही वह उस समय सोता है।
English meaning
When he is deeply asleep, when he is aware of nothing at all, there are seventy-two thousand channels called Hita extending from the heart toward the puritat. Withdrawing through them, he rests in the puritat. As a child, a great king or a great Brahmin might sleep after reaching an utmost degree of happiness, so he sleeps then.
व्याख्या
पुरीतत् को सामान्यतः हृदय के आसपास का आवरण या क्षेत्र समझा जाता है; उसका आधुनिक अंग से निश्चित साम्य नहीं किया गया। बहत्तर हजार नाड़ियों का विवरण ग्रन्थ की प्राचीन देह-कल्पना है, चिकित्सकीय तथ्य या अभ्यास-निर्देश नहीं। तीन व्यक्तियों की उपमा निर्बाध विश्राम को समझाती है।
Explanation
Puritat is commonly understood as a covering or region around the heart; no exact modern anatomical identification is asserted. The seventy-two thousand channels belong to the text’s ancient model of the body, not a clinical fact or a prescription. The three examples illustrate untroubled repose.
संदर्भ
स्वप्न के बाद सुषुप्ति का वर्णन है, जिसमें कोई विशिष्ट वस्तु जानी नहीं जाती।
Context
After dreams comes deep sleep, in which no particular object is known.