Passage 7.12
स होवाच गार्ग्यः य एवायं छायामयः पुरुष एतमेवाहं ब्रह्मोपास इति । स होवाचाजातशत्रुः मा मैतस्मिन्संवदिष्ठाः । मृत्युरिति वा अहमेतमुपास इति । स य एतमेवमुपास्ते सर्वं हैवास्मिंल्लोक आयुरेति । नैनं पुरा कालान्मृत्युरागच्छति ॥ १२ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह गार्ग्यः उवाच-यः एव अयम् छायामयः पुरुषः [अस्ति], एतम् एव अहम् ब्रह्म उपासे इति । सः ह अजातशत्रुः उवाच-मा मा एतस्मिन् संवदिष्ठाः । मृत्युः इति वा अहम् एतम् उपासे इति । सः यः एतम् एवम् उपास्ते, [सः] अस्मिन् लोके सर्वम् आयुः ह एव एति; मृत्युः एनम् कालात् पुरा न आगच्छति ।
हिन्दी अर्थ
गार्ग्य ने कहा: मैं छाया से बने इस पुरुष की ही ब्रह्म के रूप में उपासना करता हूँ। अजातशत्रु ने कहा: इस विषय में मुझसे बात मत बढ़ाइए; मैं इसकी उपासना मृत्यु के रूप में करता हूँ। जो इसकी इस प्रकार उपासना करता है, वह इस लोक में पूरी आयु बिताता है; समय से पहले मृत्यु उसके पास नहीं आती।
English meaning
Gargya said, “I meditate on this person made of shadow as Brahman.” Ajatashatru replied, “Do not pursue this account with me; I meditate on it as death.” Whoever meditates on it in this way receives this result: That person lives out a full lifespan in this world; death does not come before the appointed time.
व्याख्या
मृत्यु को ध्यानविषय बनाकर उसका फल पूर्ण आयु कहा गया है। यह मृत्यु और जीवन की परस्पर सीमा पर वैदिक चिन्तन है, वास्तविक स्वास्थ्य-जोखिम को अनदेखा करने की अनुमति नहीं।
Explanation
Meditating on death is here assigned the fruit of a full lifespan. This is Vedic reflection on the boundary between life and death, not permission to disregard actual health risks.
संदर्भ
जीवन-ध्वनि के बाद छायामय पुरुष को मृत्यु के रूप में ध्यान किया जाता है।
Context
After the sound associated with life, the shadow-person is contemplated as death.