Passage 7.10
स होवाच गार्ग्यः य एवायं यन्तं पश्चाच्छब्दोऽनूदेत्येतमेवाहं ब्रह्मोपास इति । स होवाचाजातशत्रुः मा मैतस्मिन् संवदिष्ठाः । असुरिति वा अहमेतमुपास इति । स य एतमेवमुपास्ते सर्वं हैवास्मिंल्लोक आयुरेति । नैनं पुरा कालात्प्राणो जहाति ॥ १० ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह गार्ग्यः उवाच-यः एव अयम् शब्दः यन्तम् [पुरुषम्] पश्चात् अनूदेति, एतम् एव अहम् ब्रह्म उपासे इति । सः ह अजातशत्रुः उवाच-मा मा एतस्मिन् संवदिष्ठाः । असुः इति वा अहम् एतम् उपासे इति । सः यः एतम् एवम् उपास्ते, [सः] अस्मिन् लोके सर्वम् आयुः ह एव एति; प्राणः एनम् कालात् पुरा न जहाति ।
हिन्दी अर्थ
गार्ग्य ने कहा: मैं चलते हुए व्यक्ति के पीछे उठने वाली इस ध्वनि की ही ब्रह्म के रूप में उपासना करता हूँ। अजातशत्रु ने कहा: इस विषय में मुझसे बात मत बढ़ाइए; मैं इसकी उपासना जीवन-शक्ति के रूप में करता हूँ। जो इसकी इस प्रकार उपासना करता है, वह इस लोक में अपनी पूरी आयु बिताता है; समय से पहले प्राण उसका साथ नहीं छोड़ता।
English meaning
Gargya said, “I meditate on this sound that follows behind a person walking as Brahman.” Ajatashatru replied, “Do not pursue this account with me; I meditate on it as vital life.” Whoever meditates on it in this way receives this result: That person lives out a full lifespan in this world; the breath of life does not leave before the appointed time.
व्याख्या
राजा उस ध्वनि को असु, अर्थात् जीवन, के नाम से जानते हैं। आयु सम्बन्धी फल प्राचीन उपासना का कथन है; उसे रोग-निवारण, सुरक्षित जीवन या मृत्यु टालने की चिकित्सा-सलाह न समझें।
Explanation
The king knows this sound as asu, vital life. The promised lifespan is part of the ancient meditation teaching, not medical advice for preventing illness, ensuring safety or postponing death.
संदर्भ
बालाकि अब चलते व्यक्ति के पीछे सुनाई देने वाली ध्वनि को ब्रह्म कहते हैं।
Context
Balaki now calls the sound following a walking person Brahman.