Passage 11.6
इमा दिशः सर्वेषां भूतानां मधु । आसां दिशां सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमासु दिक्षु तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं श्रौत्रः प्रातिश्रुत्कस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
इमाः दिशः सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [सन्ति] । आसाम् दिशाम् सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । आसु दिक्षु यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् श्रौत्रः प्रातिश्रुत्कः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
ये दिशाएँ सभी प्राणियों का मधु हैं और इन दिशाओं के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इन दिशाओं में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर श्रवण और प्रत्युत्तर-ध्वनि के रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
These directions are honey for all beings, and all beings are honey for these directions. The radiant, immortal person in these directions and the radiant, immortal person within the individual as hearing and answering resonance are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
श्रौत्र सुनने से सम्बन्धित है और प्रातिश्रुत्क प्रतिध्वनि या उत्तर देने वाली ध्वनि का संकेत है। दोनों पद रखे गए हैं; एक को हटाकर केवल “कान” कहना पाठ को छोटा कर देता। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Shrautra concerns hearing; pratishrutka evokes echo or answering sound. Both are retained rather than reducing the phrase to the ear alone. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
दिशाओं का सम्बन्ध कान और लौटती या उत्तर देती ध्वनि से स्थापित होता है।
Context
The directions are correlated with hearing and returning or answering sound.