Passage 11.4
अयं वायुः सर्वेषां भूतानां मधु । अस्य वायोः सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्मिन् वायौ तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं प्राणस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदं अमृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अयम् वायुः सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्य वायोः सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्मिन् वायौ यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् प्राणः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह वायु सभी प्राणियों का मधु है और इस वायु के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस वायु में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर प्राण के रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This wind is honey for all beings, and all beings are honey for this wind. The radiant, immortal person in this wind and the radiant, immortal person within the individual as vital breath are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
वायु और श्वास में गति का निकट सम्बन्ध है, पर शिक्षा केवल भौतिक समानता नहीं बताती। दोनों के तेजोमय अमृतमय पुरुष को एक आत्मा कहा गया है। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Wind and breathing share a familiar movement, but the teaching is not limited to a physical resemblance. Their radiant, immortal person is identified with one Self. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
वायु का बाह्य रूप प्राण के आन्तरिक रूप के सामने रखा जाता है।
Context
External wind is placed alongside inward vital breath.