Passage 11.10
अयमाकाशः सर्वेषां भूतानां मधु । अस्याकाशस्य सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्मिन्नाकाशे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं हृद्याकाशस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ १० ॥
पदच्छेद
अन्वय
अयम् आकाशः सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्य आकाशस्य सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्मिन् आकाशे यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् हृद्याकाशः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह आकाश सभी प्राणियों का मधु है और इस आकाश के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस आकाश में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर हृदयाकाश के रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This space is honey for all beings, and all beings are honey for this space. The radiant, immortal person in this space and the radiant, immortal person within the individual as the space within the heart are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
हृद्याकाश भीतर के अनुभव का स्थान है। बाहरी विशालता और भीतर के आकाश का सम्बन्ध आत्मा में रखा गया है; इसे हृदय के वास्तविक आकार का खगोलीय दावा नहीं समझना चाहिए। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Heart-space is the inward locus of experience. The relationship between external vastness and inward space is grounded in the Self, not in an astronomical claim about the physical dimensions of the heart. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
बाहरी आकाश और हृदय के भीतर का आकाश एक युग्म बनाते हैं।
Context
Outer space and the space within the heart form a pair.